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शीला दीक्षित का गम मनाने के बाद फिर तेज हुई दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की लड़ाई
Wed, 31 Jul 2019 08:52 PM IST
शाहरुख खान
शशिधर पाठक, डिजिटव ब्यूरो, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, डिजिटव ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 31 Jul 2019 08:52 PM IST
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फाइल फोटो
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दिल्ली प्रदेश कांग्रेस में मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष देवेन्द्र यादव और राजेश लिलोठिया के बीच में तलवारें खिची है। शीला दीक्षित ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भेंट के बाद दिल्ली की 280 ब्लाक कमेटियों को भंग किया था।
दिल्ली के प्रदेश प्रभारी महासचिव चाको ने इसे निरस्त कर दिया था। अभी भी कांग्रेस के भीतर यह बड़ा सवाल है कि 280 ब्लाकों अध्यक्षों की वैधानिक स्थिति क्या है? बताते हैं इसी तरह के कई और पेंच हैं। हालांकि पीसी चाको अभी शांत हैं। पूर्व अध्यक्ष अजय माकन भी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन दोनों तरफ के गुट सक्रिय हो गए हैं।
केन्द्रीय नेतृत्व भी मौन
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की स्थिति बहुत विचित्र स्थिति में फंस गई है। शीला दीक्षित के असामयिक निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस में बड़ी रिक्तता हुई है। दूसरी तरफ अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी अध्यक्ष पद को लेकर नेतृत्व के संकट से जूझ रही है। पाीर्टी के नेता कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं।
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सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने को लेकर भी कोई स्थिति नहीं बन पाई है। जबकि हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। हरियाणा में तो अगले महीने के बाद कभी भी चुनाव की घोषणा हो सकती है। वहां भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है।
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दिल्ली के प्रदेश प्रभारी महासचिव चाको ने इसे निरस्त कर दिया था। अभी भी कांग्रेस के भीतर यह बड़ा सवाल है कि 280 ब्लाकों अध्यक्षों की वैधानिक स्थिति क्या है? बताते हैं इसी तरह के कई और पेंच हैं। हालांकि पीसी चाको अभी शांत हैं। पूर्व अध्यक्ष अजय माकन भी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन दोनों तरफ के गुट सक्रिय हो गए हैं।
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केन्द्रीय नेतृत्व भी मौन
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की स्थिति बहुत विचित्र स्थिति में फंस गई है। शीला दीक्षित के असामयिक निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस में बड़ी रिक्तता हुई है। दूसरी तरफ अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी अध्यक्ष पद को लेकर नेतृत्व के संकट से जूझ रही है। पाीर्टी के नेता कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं।
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सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने को लेकर भी कोई स्थिति नहीं बन पाई है। जबकि हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। हरियाणा में तो अगले महीने के बाद कभी भी चुनाव की घोषणा हो सकती है। वहां भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है।
मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम?
दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद को लेकर एक वर्ग पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू का नाम चर्चा में चला रहा है। जबकि सिद्धू का नाम दिल्ली प्रदेश कांग्रेस आला नेताओं को मंजूर नहीं है। हालांकि सिद्धू के समर्थक इस चर्चा मात्र से ही खुश हैं।
कांग्रेस के नेता मीम अफजल कहते हैं कि दिल्ली में नवजोत सिंह सिद्धू का क्या है, मैं नहीं कह सकता। मुझे नहीं लगता कि उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
वह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अन्य नेता ने सिद्धू को अध्यक्ष बनाने की चर्चा पर कहा कि मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम? पार्टी के नेता अभी इसे अफवाह ही मान रहे हैं। उनका कहना है कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के सामने खड़ी चुनौतियों को देखते हुए ऐसा होने की संभावना काफी कम है।
कांग्रेस के नेता मीम अफजल कहते हैं कि दिल्ली में नवजोत सिंह सिद्धू का क्या है, मैं नहीं कह सकता। मुझे नहीं लगता कि उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
वह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अन्य नेता ने सिद्धू को अध्यक्ष बनाने की चर्चा पर कहा कि मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम? पार्टी के नेता अभी इसे अफवाह ही मान रहे हैं। उनका कहना है कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के सामने खड़ी चुनौतियों को देखते हुए ऐसा होने की संभावना काफी कम है।