मांगें रखते ही मजदूरों का निकाल देती हैं ये कंपनी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेक्टर-25 स्थित भारत इंडस्ट्रीज इंडिया कंपनी के कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को श्रमायुक्त कार्यालय सर्कल-3 पर प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि उन्हें कंपनी से निकाल दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने मालिक से बोनस, छुट्टी व अन्य मांगें रखीं तो कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी मजूदर अपने हक की मांग उठाता है तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। आरोप है कि दो महीने में अलग-अलग कंपनियों से करीब तीन सौ मजदूरों को निकाल दिया गया। उधर, जब मालिकों का जवाब होता है कि मजदूर अपनी मर्जी से छोड़कर गए हैं।
भारत इंडस्ट्रीज इंडिया कंपनी में रहे श्रमिक दलवीर सिंह, शांति देवी, कमलकांत, वीर बहादुर, मनोज आदि ने बताया कि उन्हें कंपनी से निकाल दिया गया है। जबकि मालिक का कहना है कि श्रमिक मर्जी से हड़ताल पर गए हुए हैं। उन्हें निकाला नहीं गया है। इसी तरह डीएलएफ की मैसर्स रीजेंसी इम्पेक्स कंपनी के मजदूरों का आरोप है कि उन्होंने आईकार्ड की मांग की तो उन्हें निकाल दिया गया।
मजदूर यूनियन के आरडी यादव कहते हैं कि दो महीने में ही कंपनियों से 300 से अधिक मजदूरों को बिना किसी कारण निकाल दिया गया। उनके पास ऐसे बहुत से मजदूरों के आरोप-पत्र हैं। निकाले गए यह मजदूर उनमें से होते हैं जो कंपनी में 10-15 साल पुराने होते हैं। बताया जाता है कि कर्मचारी जब बोनस, छुट्टी, ग्रेच्युटी, स्थायी करने और ठेकेदारी प्रथा का विरोध करते हैं तो उन्हें निकाल दिया जाता है।
मजदूर यूनियन से जुड़े युद्धिष्ठिर का कहना है कि श्रम विभाग और कंपनी की मिलीभगत के चलते श्रमिकों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। जब मजदूर जनरल मांग पत्र की मांग करते हैं तो कंपनी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देती है। विभाग की ओर से कभी सर्वे नहीं किया जाता कि कितने मजदूरों को ग्रेड के आधार पर वेतन मिल रहा है। एक केस हल होने में सालों लग जाते हैं।