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अलाई दरवाजे का चल रहा संरक्षण: नए रंग रूप में पर्यटकों को करेगा आकर्षित, साइट को रोशनी से किया जाएगा जगमग
Tue, 19 Sep 2023 02:38 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 19 Sep 2023 02:38 AM IST
सार
दरवाजे के एक तरफ के बाहरी भाग पर काफी हिस्सों में टाइलें निकल चुकी हैं। यहां से उसी आकार में टाइलें व उखड़ चुके पत्थरों को लगाया जाएगा। यहां विशेष रूप से शाम के समय साइट पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इसे रोशन किया जाएगा।
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अलाई दरवाजा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कुतुब मीनार परिसर में स्थित अलाई दरवाजे का संरक्षण कार्य शुरू हो गया है। यह जल्द अपने नए रंग रूप में पर्यटकों को आकर्षित करेगा। मौसम, बारिश के चलते व संरक्षण के अभाव में यह कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसमें हल्की दरारें भी आ गई हैं। ऐसे में इन दरारों को भरने का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही दरवाजे के बाहरी भागों से उतर चुके प्लास्टर व टाइलों को ठीक किया जाएगा।
दरवाजे के एक तरफ के बाहरी भाग पर काफी हिस्सों में टाइलें निकल चुकी हैं। यहां से उसी आकार में टाइलें व उखड़ चुके पत्थरों को लगाया जाएगा। यहां विशेष रूप से शाम के समय साइट पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इसे रोशन किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस कार्य के कुछ माह में पूरा होने की उम्मीद जताई है।
खिलजी वंश के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब-ए-इस्लाम परिसर में अलाई दरवाजा बनवाया था। इसका निर्माण कार्य सन् 1316 में पूरा हुआ था। अलाई दरवाजा तुर्की कला का आकर्षक और अनूठा नमूना है। यह दरवाजा सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थरों से बना है। इस पर खूबसूरत और आकर्षक नक्काशी की गई है। दरवाजे के अंदर एक सिंगल हॉल है, जिसकी अंदर से लंबाई करीब 35 फीट और चौड़ाई 56.5 फीट है। इसकी गुंबद दार छत की ऊंचाई करीब 47 फीट है। यह एक छोटी गुंबद दार चौकोर इमारत है जिसके तीन तरफ नुकीले घोड़े की नाल की तरह मेहराब, भीतरी तरफ एक गोल मेहराब और जालीदार खिड़कियां हैं।
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धौलपुर के कारीगर कर रहे संरक्षण
अलाई दरवाजे को पुराने रूप में लाया जा रहा है। इसमें स्मारक की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यहां धौलपुर से कारीगर आए हैं। इसकी मरम्मत के लिए लाल बलुआ पत्थर को राजस्थान से मंगवाया गया है। इसके संरक्षण में लगभग 35 लाख रुपये का खर्च आने की उम्मीद है।
संरक्षण की लंबे समय से तैयारी चल रही थी। इसके पहले चरण में समय के साथ नष्ट हो चुके लाल बलुआ पत्थरों की नक्काशी को ठीक किया जाएगा। संरक्षण के बाद यह पर्यटकों को लुभाएगा। -प्रवीण सिंह, दिल्ली सर्कल चीफ व सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट, एएसआई
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दरवाजे के एक तरफ के बाहरी भाग पर काफी हिस्सों में टाइलें निकल चुकी हैं। यहां से उसी आकार में टाइलें व उखड़ चुके पत्थरों को लगाया जाएगा। यहां विशेष रूप से शाम के समय साइट पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इसे रोशन किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस कार्य के कुछ माह में पूरा होने की उम्मीद जताई है।
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खिलजी वंश के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब-ए-इस्लाम परिसर में अलाई दरवाजा बनवाया था। इसका निर्माण कार्य सन् 1316 में पूरा हुआ था। अलाई दरवाजा तुर्की कला का आकर्षक और अनूठा नमूना है। यह दरवाजा सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थरों से बना है। इस पर खूबसूरत और आकर्षक नक्काशी की गई है। दरवाजे के अंदर एक सिंगल हॉल है, जिसकी अंदर से लंबाई करीब 35 फीट और चौड़ाई 56.5 फीट है। इसकी गुंबद दार छत की ऊंचाई करीब 47 फीट है। यह एक छोटी गुंबद दार चौकोर इमारत है जिसके तीन तरफ नुकीले घोड़े की नाल की तरह मेहराब, भीतरी तरफ एक गोल मेहराब और जालीदार खिड़कियां हैं।
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धौलपुर के कारीगर कर रहे संरक्षण
अलाई दरवाजे को पुराने रूप में लाया जा रहा है। इसमें स्मारक की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यहां धौलपुर से कारीगर आए हैं। इसकी मरम्मत के लिए लाल बलुआ पत्थर को राजस्थान से मंगवाया गया है। इसके संरक्षण में लगभग 35 लाख रुपये का खर्च आने की उम्मीद है।
संरक्षण की लंबे समय से तैयारी चल रही थी। इसके पहले चरण में समय के साथ नष्ट हो चुके लाल बलुआ पत्थरों की नक्काशी को ठीक किया जाएगा। संरक्षण के बाद यह पर्यटकों को लुभाएगा। -प्रवीण सिंह, दिल्ली सर्कल चीफ व सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट, एएसआई