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Hip Replacement : 125 किलो के मरीज का हुआ सफल रहा हिप रिप्लेसमेंट, वजन ने बढ़ा दी थीं चिकित्सकों की चुनौतियां
Wed, 23 Jul 2025 02:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 23 Jul 2025 02:25 AM IST
सार
58 वर्षीय मरीज समीर कपूर लंबे समय से स्टेरॉयड लेने के साथ तीन साल से दाएं कूल्हे में दर्द से परेशान थे। यह तकलीफ एक दुर्लभ रोग एवास्क्युलर नेक्रोसिस के कारण थी।
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विस्तार
दक्षिणी दिल्ली के एक निजी अस्पताल में 125 किलोग्राम वजनी मरीज की टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सफतलापूर्वक की गई। 58 वर्षीय मरीज समीर कपूर लंबे समय से स्टेरॉयड लेने के साथ तीन साल से दाएं कूल्हे में दर्द से परेशान थे। यह तकलीफ एक दुर्लभ रोग एवास्क्युलर नेक्रोसिस के कारण थी।
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इस स्थिति में ब्लड सप्लाई में कमी होने के कारण बोन टिश्यू मृत होने लगते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस वजन के साथ सर्जरी करना काफी जटिल होता है। सर्जरी के बाद संक्रमण के साथ, इंप्लांट फेल होने और मांसपेशियों में दिक्कत होने की आशंका भी रहती है।
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डॉ. कौशल कांत मिश्रा ने बताया कि यह सर्जरी 50 मिनट चली। इसके बाद मरीज की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा और 4 दिन बाद उन्हें स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। उन्होंने कहा कि भारी वजन वाले मरीजों में हिप रिप्लेसमेंट प्रक्रिया में सफलता काफी दुर्लभ है।
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उन्होंने बताया कि 2022 में मरीज जांच के बाद एवास्क्युलर नेक्रोसिस से ग्रस्त पाया गया जहां उनकी कोर डीकम्प्रेशन सर्जरी की गई लेकिन इससे उन्हें कुछ ही समय के लिए राहत मिली। उन्हें फिर से दर्द होने लगा।
समस्या बढ़ने के बाद उन्हें दिल्ली लाया गया। अस्पताल में एक्स-रे और एमआरआई जांच से पता चला कि वह एवास्क्युलर नेक्रोसिस की एडवांस स्टेज से पीड़ित थे। डॉक्टरों ने उनके लिए टोटल हिप आर्थोप्लास्टी को चुना। उस समय मरीज का वजन 125 किलोग्राम था। डॉक्टरों ने उन्हें फॉलोअप पर रखा। धीरे-धीरे उनका वजन घटकर 123.3 किलो (सर्जरी के 1 सप्ताह बाद) और सर्जरी के 3 सप्ताह बाद 119.2 किलोग्राम हो गया था।
जांच के बाद मरीज सर्जरी के लिए फिट मिला। डॉ. विक्रम अग्रवाल ने कहा कि अक्सर 100 किलो से अधिक वजन वाले मरीज के हिप रिप्लेसमेंट से सर्जन बचते हैं। इस सर्जरी के बाद यह तय हो गया कि यदि मरीज फिट हैं तो किसी भी वजन के साथ सर्जरी कर सकते हैं। वहीं, यदि मरीज नियमित टहले तो उसका वजन घट सकता है। इस मरीज का वजन भी केवल टहलने से लगातार घट रहा है।