सम-विषम के दौरान राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में जाम की जांच करेगी कमेटी
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दूसरे चरण के सम-विषम के दौरान राजधानी के विभिन्न इलाकों में ट्रैफिक जाम पर बीजेपी और कांग्रेस की नाराजगी व आलोचना झेल रही आप सरकार ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।
कमेटी पांच मई को अपनी रिपोर्ट में 30 अप्रैल तक जाम के कारण और सुझाव भी देगी। दिल्ली परिवहन मंत्री गोपाल राय ने सिविल लाइन में शनिवार को बताया कि विरोधी पार्टियों का आरोप है कि राजधानी में सम-विषम का कोई फायदा नहीं है।
सड़कों पर जाम आम दिनों की तरह लग रहा है। प्रदूषण की मात्रा भी कम नहीं हुई है। गोपाल राय का कहना था कि प्रदूषण की मात्रा बॉर्डर इलाकों में अधिक है। क्योंकि नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद व गुड़गांव में सम-विषम नहीं है।
32 प्वाइंट चिह्नित होने के बाद छह सदस्यीय कमेटी
दूसरा इन इलाकों में निर्माण कार्य व हवा के साथ प्रदूषण के कण दिल्ली में आ जाते हैं। इसके अलावा दिल्ली के डंपिंग ग्राउंड व यमुना किनारे लगी आग के चलते भी प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है। जाम के 32 प्वाइंट चिह्नित करने के बाद अब छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
इस कमेटी में दिल्ली मेट्रो, डीटीसी के अलावा नारंगी बसों का संचालन करने वाली डिम्ट्स, दिल्ली ट्रैफिक के साथ शिक्षा विभाग के अधिकारी को भी शामिल किया गया है। कमेटी अपने-अपने क्षेत्रों में विस्तार से रिपोर्ट लेगी और यात्रियों की दिक्कतों पर भी रिपोर्ट बनाएगी। शिक्षा अधिकारी को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य है कि स्कूलों में आने वाले वाहनों की जानकारी प्राप्त की जा सके।
गोपाल राय का कहना है कि गर्मी में पैरेंट्स स्कूल कार में एसी की ठंडी हवा के बीच घर लाना चाहते हैं। इसी के चलते स्कूलों के आसपास सुबह और दुपहर को जाम देखने को मिलता है। इसके अलावा ऑफिस जाने वाले लोग भी दुपहिया या पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बजाय अपनी कार से जाना चाहते हैं। यह भी जाम बढ़ने का कारण हो सकता है। हालांकि कमेटी अपनी रिपोर्ट में हर पहलू को सामने लाएगी।