फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Cockroach Janata Party: A movement that began as satire and became a subject of national debate.

कॉकरोच जनता पार्टी : व्यंग्य से शुरू हुआ आंदोलन, जो बना राष्ट्रीय बहस का विषय

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 07:56 PM IST
विज्ञापन
Cockroach Janata Party: A movement that began as satire and became a subject of national debate.
केंद्रीय ​शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद जश्न मनाते सीजेपी कार्यकर्ता। - फोटो : Amar Ujala
सीजेआई की कथित टिप्पणी के विरोध से शुरू हुई मुहिम
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का उदय मई 2026 में उस कथित टिप्पणी के विरोध में हुआ, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से किए जाने की बात कही गई। इस कथित टिप्पणी को युवाओं ने विरोध का प्रतीक बना लिया और इसे व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान का रूप दिया।
राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने 16 मई 2026 को सीजेपी की शुरुआत एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक मंच के रूप में की। उनका कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीजेआई का बयान देखा, जिसमें व्यवस्था की आलोचना करने और अपनी राय रखने वाले युवाओं के लिए कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। दिपके के अनुसार, यह टिप्पणी इसलिए अधिक गंभीर लगी क्योंकि संविधान का संरक्षक माने जाने वाले मुख्य न्यायाधीश से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की अपेक्षा की जाती है।
विज्ञापन

शुरुआत में यह अभियान केवल सोशल मीडिया तक सीमित था, लेकिन कुछ ही समय में इसे छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक समूहों का समर्थन मिलने लगा। जंतर-मंतर पर धरना, डिजिटल अभियान और देशभर से जुटते समर्थकों ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया। बाद में शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन से जुड़ने के बाद इसे और व्यापक समर्थन मिला। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

आंदोलन का मुख्य केंद्र शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रहा। जुलाई के अंतिम सप्ताह में आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया। पुलिस कार्रवाई, विपक्ष के प्रदर्शन, सरकार के आश्वासन और प्रधानमंत्री के संबोधन के बीच आंदोलन लगातार चर्चा में बना रहा। अंततः 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।

ऐसे चला घटनाक्रम
16 मई 2026: अभिजीत दिपके ने व्यंग्यात्मक ऑनलाइन मंच के रूप में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की शुरुआत की। कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम और एक्स पर बड़ी संख्या में समर्थक जुड़ गए।
6 जून: अमेरिका से लौटने के बाद अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर छह घंटे का पहला प्रदर्शन किया। छात्रों और समर्थकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।
7–19 जून: सीजेपी ने जागरूकता अभियान, डिजिटल मुहिम और समय-समय पर धरने के जरिए जवाबदेही की मांग जारी रखी।
20 जून: जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ।
21 जून: अभिजीत दिपके ने नीट अभ्यर्थियों से परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
22–27 जून: धरना जारी रहा। सैकड़ों लोग प्रदर्शन स्थल पहुंचे, लेकिन आंदोलन अभी राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा नहीं बन पाया था।
28 जून: सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पहुंचे और छह छात्रों के साथ भूख हड़ताल शुरू की।
30 जून: सीजेपी ने आंदोलन और जनसंपर्क अभियान तेज किया।
1–17 जुलाई: आंदोलन को धीरे-धीरे व्यापक समर्थन मिलने लगा और प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
18 जुलाई: तड़के पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर कार्रवाई की और सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। राहुल गांधी ने समर्थन जताया, जबकि अभिजीत दिपके ने अनशन की घोषणा की।
19 जुलाई: मानसून सत्र से पहले संसद मार्च की तैयारी के लिए हजारों लोग जंतर-मंतर पर जुटने लगे।
20 जुलाई: 50 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली में प्रदर्शन किया। पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस तथा कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया। झड़पों में 100 से अधिक प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा।
21–25 जुलाई: देशभर से लोग जंतर-मंतर पहुंचे। विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया।
21 जुलाई: राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
22–25 जुलाई: सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो ने प्रदर्शन स्थल के आसपास एक दर्जन से अधिक स्टेशन अस्थायी रूप से बंद किए।
23–24 जुलाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून का आश्वासन दिया। जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया।
24 जुलाई: सीजेपी प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्रियों से दोबारा वार्ता हुई। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर वे अडिग रहे और सरकार को 24 घंटे का समय दिया। देर रात प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से फिर संदेश जारी किया।

25 जुलाई: जंतर-मंतर पर भीड़ बढ़ने के बीच पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसी दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed