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सीएम ने दिया दो महीने पहले आदेश निगम को खबर ही नहीं

Thu, 16 Apr 2015 11:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 16 Apr 2015 11:34 PM IST
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CM  gave orders two months ago, News Corporation sleeping now

बिजली निगम में मुख्यमंत्री का आदेश भी नहीं माना जा रहा है। निगम की विजिलेंस शाखा की ओर से भ्रष्टाचार के आरोपी करार दिए गए 57 अफसरों पर एफआईआर दर्ज करने के मामले में तो कम से कम ऐसा ही हो रहा है।

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जबकि यह आदेश दो माह पहले जारी किए गए थे। कहानी यहीं खत्म नहीं हो रही है। निगम अधिकारी नियमों को धता बताकर यूनियनगीरी पर उतर आए हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब मुख्यमंत्री के आदेश का ही पालन नहीं हो रहा है तो बिजली निगम में आम जनता की कौन सुनेगा। उधर, आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन का कहना है कि दबाव में झुकने से सरकार की साख पर बट्टा लग रहा है।

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ये है पूरा मामला:
-वर्ष 2014 में यहां पिलर बॉक्स घोटाला सामने आया था। आरटीआई कार्यकर्ता वरुण श्यौकंद ने इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया था। मामला तूल पकड़ने पर राज्य सतर्कता विभाग ने जांच की। इसमें विभाग ने बिजली निगम के 57 अधिकारियों को भ्रष्टाचार में शामिल होना पाया और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश सरकार से की। मुख्य सचिव हरियाणा ने 16 फरवरी 2015 को अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा विभाग को पत्र लिखा और घोटाले में शामिल निगम अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने यह आदेश मुख्यमंत्री की अनुमति मिलने के बाद दिए थे।
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अधिकारी एफआईआर दर्ज कराने को तैयार नहीं
-एफआईआर दर्ज कराने का आदेश आने के बाद जब निगम अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया तो विभाग के उच्चाधिकारी और सरकार दबाव में आ गए। सीएम के आदेश के दो महीने बाद भी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। वहीं निगम के अधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बारे में दक्षिण हरियाणा विद्युत वितरण निगम के एसई मुकेश गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स मीट में व्यस्त हूं, अभी बात नहीं करूंगा।


एक्ट में हड़ताल का नहीं है अधिकार

-सुप्रीम कोर्ट के  वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पद्श्री डॉ. ब्रह्मदत्त का कहना है कि सर्विस कंडक्ट एंड अपील रूल्स के तहत निगम के अधिकारियों को हड़ताल करने का कोई अधिकार नहीं है। इंडियन ट्रेड यूनियन एक्ट 1626 के तहत ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को ही धरना-प्रदर्शन और हड़ताल करने का अधिकार है। इसके लिए उन्हें 15 दिन पहले नोटिस देना होता है। सर्विस कंडक्ट रूल्स के तहत बगैर बताए 10 मिनट भी सीट से गायब रहने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट की जा सकती है। यहां तक कि उन्हें बर्खास्त भी किया जा सकता है। किस अधिकार के तहत निगम अधिकारी हड़ताल कर रहे हैं, समझ से परे है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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