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दिल्ली : तिहाड़ की जेल नंबर 4 में रांका, जेल नंबर 2 में सौरव दास; पुलिस ने सीजेपी नेताओं पर क्यों की कार्रवाई?
Wed, 14 Oct 2026 11:42 AM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Wed, 14 Oct 2026 11:42 AM IST
सार
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के अगले ही दिन मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के करीब 20 कार्यकर्ता तिरंगा लेकर वहां पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने जदयू कार्यालय का गेट पार किया और भारी बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन स्थल पर तिरंगा फहराया था।
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आशुतोष रांका और सौरव दास
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तीन नेताओं आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में एसईएम कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आशुतोष रांका, और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, अंजिक्य शिंदे को पुलिस ने बॉन्ड भरवाने के बाद रिहा कर दिया है। तिहाड़ जेल में सौरव दास और आशुतोष रांका को अलग-अलग जेल में रखा गया है। सौरव दास को जेल नंबर 2 में रखा गया है। वहीं, आशुतोष रांका को जेल नंबर 4 में रखा गया है।
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रिहा होने के बाद सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने कहा, 'आप जानते होंगे कि आशुतोष, सौरव दास और मैं, सीजेपी के वॉलंटियर्स के साथ जंतर-मंतर गए थे। हमने बस भारतीय तिरंगा लहराया और 'भारत माता की जय' का नारा लगाया। इसके लिए तानाशाह मोदी-शाह सरकार ने सौरव और आशुतोष को पांच दिन के लिए जेल भेज दिया है। आज आशुतोष का जन्मदिन था, और उनके जन्मदिन पर ही उन्हें 'भारत माता की जय' का नारा लगाने और तिरंगा लहराने के लिए जेल भेज दिया गया है। मैं देश के सभी लोगों से कहना चाहता हूं कि इस सरकार ने देश के लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए अपने सिस्टम का इस्तेमाल और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। मैं सभी से अपील करता हूं कि हमें इस तानाशाह सरकार को खत्म करने के लिए एकजुट होना होगा। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि अगर सरकार को लगता है कि हमारे दो नेताओं, आशुतोष और सौरव, को पांच दिन के लिए जेल भेजने से वे डर जाएंगे, तो वह बिल्कुल गलत है। उन्होंने बस इतना कहा है कि वे सिर ऊंचा करके जेल जा रहे हैं। उन्होंने देश के लोगों से कहा है कि वे डरेंगे नहीं।'
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सीजेपी के सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे की ओर से पेश वकील अभिष्ट हेला ने कहा, 'पुलिस के इस अंदाज़े के आधार पर कि वे कोई अपराध कर सकते हैं, उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने कोर्ट में झूठ बोला कि उन्होंने लोगों को वहां आने के लिए कहा था। उन्होंने ऐसा कोई आह्वान नहीं किया था। उन्होंने बॉन्ड का उल्लंघन नहीं किया है। कनॉट प्लेस वाली अलग शिकायत का यहां गलत इस्तेमाल किया गया है, और उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।'
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पेशी से पहले सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया था कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर मामले में सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार कर लिया। इन पर बिना इजाजत प्रवेश, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप हैं।
दिल्ली पुलिस का बयान
दिल्ली पुलिस ने बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन्होंने बार-बार सार्वजनिक शांति भंग करने, कानून तोड़ने और सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को भी ऐसी ही गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने की कोशिश की। शुरुआत में सभी 14 लोगों को हिरासत में लेकर नियमों के तहत कार्रवाई की गई थी। घटना के संबंध में दो एफआईआर दर्ज कीं। एफआईआर नंबर 289/26 कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में धारा 223(ए), 332 और 61(2) के तहत दर्ज की गई, जबकि एफआईआर नंबर 128/26 पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) के तहत दर्ज की गई। दोनों एफआईआर 13 अक्टूबर को दर्ज की गईं।
पुलिस ने बयान में कहा, 'सार्वजनिक शांति भंग करने और कानून का उल्लंघन करने की उनकी कथित बार-बार की कोशिशों को देखते हुए, आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को कानून के संबंधित एहतियाती प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को ऐसी ही गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने की उनकी कथित कोशिशों को भी ध्यान में रखा गया।'
पुलिस के मुताबिक, तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत कार्यवाही शुरू की गई। अदालत ने बार-बार कानून तोड़ने और भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों को अंजाम देने की आशंका को देखते हुए सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में भेज दिया। वहीं, आजिंक्य शिंदे को 5000 रुपये के निजी मुचलके और श्योरिटी बांड भरने के बाद 6 महीने तक शांति और अच्छा आचरण बनाए रखने की शर्त पर जमानत पर छोड़ दिया।
तिरंगा लेकर जंतर मंतर प्रदर्शन करने पहुंचे थे सीजेपी कार्यकर्ता
बता दें कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के अगले ही दिन मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के करीब 20 कार्यकर्ता तिरंगा लेकर वहां पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने जदयू कार्यालय का गेट पार किया और भारी बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन स्थल पर तिरंगा फहराया। उसके बाद दिल्ली पुलिस ने पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका, सौरव दास और राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे समेत सभी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था।
सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को दिया था 24 घंटे का अल्टीमेटम
सीजेपी ने प्रदर्शनस्थलों की सूची से जंतर-मंतर को हटाने के फैसले को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर चोट बताया है। सीजेपी के प्रतिनिधि सोमवार को संसद मार्ग थाने पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस को पत्र देकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की थी। पार्टी के मुताबिक, उसने 24 घंटे में जवाब मांगा था। इसी दिन जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला आया।
लोगों की आवाज नहीं दबा सकते: दिपके
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद कहा कि प्रशासन विरोध की जगह को सूची से बाहर कर सकता है, लेकिन लोगों की आवाज नहीं दबा सकता। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया।
फेक न्यूज वाले चार सोशल मीडिया खातों पर केस
पुलिस ने ऐसे सोशल मीडिया खातों के खिलाफ चार केस दर्ज किया है, जिन पर 10 अक्तूबर के सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान फेक न्यूज फैलाने और माहौल खराब करने का आरोप है। इनमें कई खाते पाकिस्तानी हैं। इन खातों से मौतें होने की झूठी खबरें फैलाई। ऐसे 500 खाते सोशल मीडिया से हटाए जा चुके हैं। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भ्रामक जानकारी फैलाने, 'भारत विरोधी विमर्श' तैयार करने की कोशिश और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में सोशल मीडिया खातों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। पाकिस्तान से संचालित खातों पर प्रदर्शनों के संबंध में पोस्ट और दावों के जरिए भ्रम फैलाने का आरोप है।