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चॉकलेट में है ‘जहर’.. बच्चों! इसे मत खाना
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 28 Feb 2016 09:52 AM IST
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रमतेराम रोड से लिए गए मिर्च पाउडर में वाटर कलर तो लोनी के ट्रानिका सिटी की एक फैक्ट्री की टॉफी-चाकलेट में केमिकल युक्त फ्लेवर की मिलावट पाई गई है।
कविनगर के गुलाब रेस्टोरेंट के भी चार सैंपल जांच में फेल गए हैं। कई अन्य प्रतिष्ठानों के सैंपल भी फेल पाए गए। फूड सेफ्टी विभाग ने इनके खिलाफ अभियोग दर्ज कराया है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी कृष्ण गोपाल यादव के अनुसार विभाग के अफसरों ने दिसंबर में रमतेराम रोड स्थित मोहन ग्राइंडर्स से मिर्च पाउडर का सैंपल लेकर जांच को भेजा गया था।
स्टेट लैब की जांच में इसमें वाटर कलर की मिलावट पाई गई है। इससे मिर्च पाउडर का रंग ज्यादा सुर्ख हो जाता है। इस रंग के प्रयोग से लोगों को कैंसर और आंतों की टीबी होने की आशंका बढ़ जाती है।
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ट्रोनिका सिटी में कीवी फूड्स प्रा. लिमिटेड में टॉफियां और चाकलेट बनाई जाती हैं। इनमें स्वाद के लिए खतरनाक केमिकल मिलाया जाता है।
इससे बच्चों की आंत में छेद होने और गुर्दे फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। कंपनी मालिक ने सैंपल लेने का भी विरोध किया था और टीम को बंधक बना लिया था।
बाद में सूचना पाकर पहुंचे कोतवाल और एसडीएम ने टीम को छुड़ाया था। इसके साथ ही क्रासिंग्स रिपब्लिक स्थित एवरग्रीन मिष्ठान भंडार से मावे, कविनगर के गुलाब रेस्टोरेंट की पालक मट्ठी, बिस्कुट, पनीर और मावे के सैंपल जांच में फेल मिले हैं।
सुगंध मिष्ठान भंडार की मावा गुझिया जांच में फेल हो गई है। भौपुरा के सर्वेश के यहां से लिया गया पनीर का सैंपल फेल मिला है। मोदीनगर से ली गई पहले वाली मैगी नूडल्स और पनीर, मुरादनगर से लिया गया बूंदी का लड्डू जांच में फेल मिले हैं।
सीएफएसओ मनोज तोमर ने बताया कि सभी संबंधित पक्षों को सैंपल फेल होने का नोटिस भेज दिया गया है। इनके खिलाफ अभियोग भी दर्ज करा दिया है।
इनका पक्ष भी जान लीजिए
सैंपल लेते समय ही मानकों का पालन नहीं किया गया था। फैक्ट्री में एक्सपायर रखे एसेंस केमिकल का सैंपल लेकर जांच को भेजा गया। इस रिपोर्ट को हम चुनौती देंगे। - एसके शर्मा, मैनेजर बीवी फूड लिमिटेड।
हमारे सैंपल सेहत के लिए खतरनाक नहीं हैं। कुछ मानकों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इससे गुणवत्ता पर अंतर नहीं पड़ता है। - आरके सिंह, गुलाब रेस्टारेंट
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कविनगर के गुलाब रेस्टोरेंट के भी चार सैंपल जांच में फेल गए हैं। कई अन्य प्रतिष्ठानों के सैंपल भी फेल पाए गए। फूड सेफ्टी विभाग ने इनके खिलाफ अभियोग दर्ज कराया है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी कृष्ण गोपाल यादव के अनुसार विभाग के अफसरों ने दिसंबर में रमतेराम रोड स्थित मोहन ग्राइंडर्स से मिर्च पाउडर का सैंपल लेकर जांच को भेजा गया था।
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स्टेट लैब की जांच में इसमें वाटर कलर की मिलावट पाई गई है। इससे मिर्च पाउडर का रंग ज्यादा सुर्ख हो जाता है। इस रंग के प्रयोग से लोगों को कैंसर और आंतों की टीबी होने की आशंका बढ़ जाती है।
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ट्रोनिका सिटी में कीवी फूड्स प्रा. लिमिटेड में टॉफियां और चाकलेट बनाई जाती हैं। इनमें स्वाद के लिए खतरनाक केमिकल मिलाया जाता है।
इससे बच्चों की आंत में छेद होने और गुर्दे फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। कंपनी मालिक ने सैंपल लेने का भी विरोध किया था और टीम को बंधक बना लिया था।
बाद में सूचना पाकर पहुंचे कोतवाल और एसडीएम ने टीम को छुड़ाया था। इसके साथ ही क्रासिंग्स रिपब्लिक स्थित एवरग्रीन मिष्ठान भंडार से मावे, कविनगर के गुलाब रेस्टोरेंट की पालक मट्ठी, बिस्कुट, पनीर और मावे के सैंपल जांच में फेल मिले हैं।
सुगंध मिष्ठान भंडार की मावा गुझिया जांच में फेल हो गई है। भौपुरा के सर्वेश के यहां से लिया गया पनीर का सैंपल फेल मिला है। मोदीनगर से ली गई पहले वाली मैगी नूडल्स और पनीर, मुरादनगर से लिया गया बूंदी का लड्डू जांच में फेल मिले हैं।
सीएफएसओ मनोज तोमर ने बताया कि सभी संबंधित पक्षों को सैंपल फेल होने का नोटिस भेज दिया गया है। इनके खिलाफ अभियोग भी दर्ज करा दिया है।
इनका पक्ष भी जान लीजिए
सैंपल लेते समय ही मानकों का पालन नहीं किया गया था। फैक्ट्री में एक्सपायर रखे एसेंस केमिकल का सैंपल लेकर जांच को भेजा गया। इस रिपोर्ट को हम चुनौती देंगे। - एसके शर्मा, मैनेजर बीवी फूड लिमिटेड।
हमारे सैंपल सेहत के लिए खतरनाक नहीं हैं। कुछ मानकों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इससे गुणवत्ता पर अंतर नहीं पड़ता है। - आरके सिंह, गुलाब रेस्टारेंट