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‘चिपको आंदोलन’ बचाएगा हरियाली, वेस्ट मैनेजमेंट योजना को लग सकता है झटका
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 16 Apr 2016 09:24 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पेड़ों को बचाने के लिए 1974 में उत्तराखंड में जिस तरह ‘चिपको आंदोलन’ चला था। अब इसी तरह का आंदोलन अरावली की हरियाली को बचाने के लिए चलेगा। इस आंदोलन से सरकार की बंधवाड़ी में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की योजना को बड़ा झटका लग सकता है।
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बता दें कि फरीदाबाद-गुड़गांव के 1100 टन कचरे को निस्तारित करने के लिए बंधवाड़ी में प्लांट स्थापित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए करीब 25 हजार पेड़ों की कटाई करने के लिए निशानदेही कर ली गई है।
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सेव अरावली संस्था के मुताबिक इससे आसपास के 25 गांवों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी जाएगी। एक भी पेड़ कटने नहीं दिया जाएगा। गांवों में बसे हजारों लोग एक-एक पेड़ से चिपक कर उन्हें कटने से बचाएंगे। नगर निगम ने 76 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2009 में अरावली पहाड़ियों के बीचों बीच बंधवाड़ी गांव में कूड़ा ट्रीटमेंट प्लांट बनाया था।
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जिसमें हर रोज फरीदाबाद व गुड़गांव का कूड़ा निस्तारण होता था लेकिन साल 2013 में ये प्लांट तकनीकी खामियों की वजह से बंद हो गया। हाल ही में निगम ने एक नया कूड़ा ट्रीटमेेंट प्लांट लगाने के लिए पाली गांव के पास करीब 92 एकड़ की जमीन चिन्हित की है। नीलकंठ नामक संस्था से सरकार का एमओयू भी हो चुका है।
तय हो रही आंदोलन की रूपरेखा
सेव अरावली संस्था के कैलाश बिधूड़ी, प्रमोद द्विवेदी, यश भड़ाना, राजीव वैद्य व जितेंद्र भड़ाना आदि का कहना है कि जल्द ही संस्था के कोर कमेटी की बैठक होगी और उसमें आंदोलन की रूपरेखा तय कर दी जाएगी। पर्यावरण को बचाने के लिए वनों को बचाना पहली प्राथमिकता न कि विकास। खुद केंद्र सरकार भी वन संरक्षण पर जोर दे रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की तरह यहां भी चिपको आंदोलन शुरू किया जाएगा। किसी भी सूरत में पेड़ों को काटने नहीं दिया जाएगा। इस आंदोलन के लिए बड़ी संख्या में गांवों के लोग तैयार हैं।
प्लांट को शिफ्ट करने की हो चुकी है मांग
गत 10 अप्रैल को डबुआ सब्जी मंडी में हुई मुख्यमंत्री की विकास रैली में क्षेत्रीय विधायक नगेंद्र भड़ाना ने भी पाली गांव में प्रस्तावित कूड़ा निस्तारण प्लांट को अन्य जगह शिफ्ट करने की मांग की थी। अब सरकार उसे कितनी गंभीरता से लेती है ये तो आने वाला वक्त बताएगा।
इन गांवों के प्रभावित होने का है अंदेशा
बंधवाड़ी, मांगर, पाली, बडख़ल, अनखीर, भाखरी, नवादा, डबुआ, बाजड़ी, बास, नेकपुर, खेड़ी, नंगला गुजरान, पाखल, नया गांव, गोठड़ा, मोहब्बताबाद, पावटा, सिलाखड़ी, धौज, सैनिक कॉलोनी, अरावली विहार, अचीवर, बडख़ल एक्सटेंसन, एसजीएम नगर, अनंगपुर, सेक्टर 48 आदि।
संस्था द्वारा जो आपत्तियां उठाई गई हैं उसे सरकार तक पहुंचा दिया गया है। सरकार उन मुद्दों पर व्यापक स्तर पर अध्ययन कर रही है। मामला सरकार के पास विचाराधीन है। अंतिम निर्णय सरकार को करना है। सरकार का जो आदेश होगा उसे पालन किया जाएगा।-डॉ. आदित्य दहिया, निगमायुक्त नगर निगम