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समस्याओं का अंबार: दिल्ली के चिल्ला गांव में लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए लड़ रहे, संपत्ति कर की झेल रहे मार

Wed, 27 Nov 2024 07:42 AM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 27 Nov 2024 07:42 AM IST
सार

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में चिल्ला गांव में लोग बुनियादी सुविधाओं से लड़ रहे हैं। लोगों ने कहा कि गांव में समस्याओं का अंबार लगा है। सबसे ज्यादा लोग संपत्ति कर की मार झेल रहे हैं। 

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Chilla village people expressed their problems in Amar Ujala Samvad program
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के दौरान चिल्ला गांव की समस्याएं बताते ग्रामीण। - फोटो : फोटो: भूपिंदर सिंह

विस्तार

पूर्वी दिल्ली का चिल्ला गांव विकास और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण उपेक्षा का शिकार है। गांव में एक भी शहर जैसी सुविधा नहीं है और शहरीकरण की आंधी में गांव की पहचान धीरे-धीरे खत्म हो रही है और इसके निवासी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। 
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दरअसल गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। वहीं ग्रामीणों पर संपत्ति कर लगा रखा है। सरकार की ओर से गांव की ओर ध्यान नहीं देने पर ग्रामीणों ने गांव की पहचान बचाने और बुनियादी सुविधाओं के लिए लड़ाई लड़नी शुरू की है। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में चिल्ला के निवासी गांव की स्थिति को लेकर काफी परेशान व चिंतित दिखाई दिए। दरअसल गांव में न तो स्कूल है और न ही खेल के मैदान की सुविधा है। 
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बच्चों को बेहतर शिक्षा और खेल के अवसरों के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा और खेल से वंचित रहकर गांव का युवा वर्ग दिशाहीन हो रहा है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को चिल्ला गांव के विकास की प्राथमिकता तय करनी चाहिए। तभी गांव का योजनाबद्ध विकास और बुनियादी सुविधाओं से गांव को उसकी समस्याओं से उबारा जा सकता है। साथ ही, गांव की पहचान को बचाने के लिए गांव के नाम से आसपास उपलब्ध सुविधाओं का नामकरण करना चाहिए।
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गांव में संपत्ति कर लगाया जाने पूरी तरह गलत है। क्योंकि जब गांव को बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही हैं, तो संपत्ति कर का औचित्य क्या है? सरकार केवल कर वसूलने में रुचि रखती है, वह गांव के विकास की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। - धर्मेद्र

गांव में पीने के लिए स्वच्छ पानी का अभाव सबसे बड़ी चिंता है। यहां दूषित पानी की आपूर्ति होती है। इसीवर जाम की समस्या ने गांववासियों का जीवन और भी कठिन बना दिया है। गली-मोहल्लों में गंदगी और दुर्गंध फैली रहती है। - सोनू पंडित 

गांव में बिजली कटौती भी आम समस्या है। अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण बच्चों की पढ़ाई से लेकर दैनिक जीवन तक प्रभावित होता है। गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। 
- राजेश


गांव के श्मशान घाट को विवाद का केंद्र बना दिया गया है। इसे तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वह बेहद आहत हैं। इसे तोड़े जाने पर गांव वालों के समक्ष शवों के अंतिम संस्कार की दिक्कत हो जाएगी। - बालकिशन


गांव के चारों ओर काॅलोनियां बस गईं हैं। उनके नाम से विभिन्न सुविधाओं का नामकरण किया जा रहा है। इस तरह गांव की पारंपरिक पहचान को खत्म करने का काम किया है। - चौ. सुंदर
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