Children's Day 2018: कानून की भाषा में भी ‘बच्चे’ की परिभाषा अलग-अलग
कानून विशेषज्ञ शिव मिश्रा के मुताबिक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 82 के अनुसार 7 वर्ष की उम्र तक बच्चा माना जाएगा। वहीं सेक्शन-83 के अनुसार दिव्यांग की श्रेणी में इसे 12 वर्ष किया गया है।
अनुच्छेद 21ए के अनुसार 6 से 14 आयु के तक बच्चे को मुफ्त शिक्षा दी जानी चाहिए। इसमें बच्चे की परिभाषा 14 वर्ष तक मानी गई है। अधिवक्ता शुभ्रा मेंदीरत्ता के मुताबिक, बालश्रम अधिनियम के तहत 14 आयुवर्ग से कम उम्र को नाबालिग अथवा बच्चा माना गया है।
जबकि फैक्ट्री एक्ट-1948 के मुताबिक, 15 वर्ष तक बच्चे की उम्र रखी गई है। ऐसे में कई तरह की परिभाषाएं निकलकर सामने आ रही हैं। वकील मुकेश के मुताबिक, आईपीसी में ही लड़कियों की उम्र का निर्धारण 16 वर्ष किया गया है जबकि भारतीय जनसंख्या गणना में 14 वर्ष से कम को नाबालिग करार दिया गया है।
कानून के जानकारों का मानना है कि बच्चों की परिभाषा को अलग-अलग तरह से परिभाषित किए जाने से कई बार कठिनाइयां सामने आ जाती हैं। ऐसे में इन्हें आयु के आधार पर एकसमान करने की आवश्यकता है।