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बच्चों की आवाज बनी हेल्पलाइन: जबरन शादी रुकवाने के लिए 17 वर्षीय बच्ची ने मांगी मदद, 24 घंटे में हुई कार्रवाई
Sun, 11 Oct 2026 01:44 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sun, 11 Oct 2026 01:44 PM IST
सार
दिल्ली में चाइल्ड हेल्पलाइन पर तीन महीने में 30,918 कॉल आईं। इनमें बाल शोषण के 735 मामले दर्ज हुए। जबरन शादी से लेकर पारिवारिक विवाद, पढ़ाई और साइबर खतरों तक, बच्चे अब अपनी और दोस्तों की मदद के लिए भी आगे आ रहे हैं।
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दिल्ली में चाइल्ड हेल्पलाइन की कार्रवाई
- फोटो : AI/अमर उजाला
विस्तार
करीब तीन महीने पहले उत्तर-पश्चिम दिल्ली की 17 वर्षीय एक बच्ची ने दिल्ली सरकार की चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन किया। उसे अपनी नहीं, सहेली की चिंता थी। सहेली की जबरन शादी कराई जा रही थी और उसे डर था कि परिवार को पता चला तो उसकी मुश्किल भी बढ़ सकती है। इसके बावजूद उसने मदद मांगी।
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हेल्पलाइन ने पहले उसका डर दूर किया और फिर संबंधित परिवार तक पहुंचकर हस्तक्षेप किया। करीब 24 घंटे में शादी रुकवा दी गई। यह घटना केवल एक बाल विवाह रुकने की कहानी नहीं, बल्कि बच्चों के बीच मदद मांगने के बढ़ते भरोसे की तस्वीर भी है। हेल्पलाइन पर अब बच्चे केवल गंभीर संकट में ही नहीं, बल्कि घर में डांट, माता-पिता से विवाद, पढ़ाई और स्कूल की समस्याओं को लेकर भी फोन कर रहे हैं। कई बच्चे शोषण, नशे, साइबर खतरे और घर से भागने जैसी स्थितियों में सहायता मांगते हैं।
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हर कॉल संकट नहीं
अधिकारियों के मुताबिक, तीन महीने में हेल्पलाइन पर 30,918 कॉल आईं। इनमें 19,124 कॉल गलत या अप्रासंगिक पाई गईं, जबकि 6,787 कॉल सूचना या पूछताछ से जुड़ी थीं। हालांकि, हर ऐसी कॉल को महज गलत कॉल मानना पूरी तस्वीर नहीं बताता। कई बच्चों को यह भी स्पष्ट नहीं होता कि उनकी समस्या किस श्रेणी में आती है या किससे मदद मांगी जाए।
अधिकारियों के मुताबिक, तीन महीने में हेल्पलाइन पर 30,918 कॉल आईं। इनमें 19,124 कॉल गलत या अप्रासंगिक पाई गईं, जबकि 6,787 कॉल सूचना या पूछताछ से जुड़ी थीं। हालांकि, हर ऐसी कॉल को महज गलत कॉल मानना पूरी तस्वीर नहीं बताता। कई बच्चों को यह भी स्पष्ट नहीं होता कि उनकी समस्या किस श्रेणी में आती है या किससे मदद मांगी जाए।
शोषण और पारिवारिक विवाद बड़ी चिंता
आंकड़ों के अनुसार, तीन महीने में बाल शोषण के 735 मामले सामने आए। इसके बाद 443 पारिवारिक विवाद, 407 बच्चों के मिलने, 346 लापता बच्चों, 244 काउंसलिंग और 190 स्कूल संबंधी समस्याओं के मामले दर्ज हुए। बाल श्रम के 135, घर से भागने के 104 और आश्रय से जुड़े 104 मामले भी सामने आए।
आंकड़ों के अनुसार, तीन महीने में बाल शोषण के 735 मामले सामने आए। इसके बाद 443 पारिवारिक विवाद, 407 बच्चों के मिलने, 346 लापता बच्चों, 244 काउंसलिंग और 190 स्कूल संबंधी समस्याओं के मामले दर्ज हुए। बाल श्रम के 135, घर से भागने के 104 और आश्रय से जुड़े 104 मामले भी सामने आए।