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बिना ऑपरेशन के बदल दिया दिल का वॉल्व, हो रहा है ये खास दावा

Mon, 26 Nov 2018 07:03 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Nov 2018 07:03 PM IST
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Changed heart valves without operation in Delhi
सांकेतिक तस्वीर

कुछ साल पहले तक यह कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि हार्ट के भीतर स्थित वॉल्व को कैथेटर की मदद से बदला जा सकता है। दिल को खोले बगैर एंजियोप्लास्टी करना और मरीज को कार्डियोपल्मोनेरी बायपास पर रखना अभी तक संभव न था, लेकिन बगैर ऑपरेशन के डॉक्टरों ने मरीज के दिल का वॉल्व बदल दिया। 

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राजधानी के फोर्टिस एस्कॉट्र्स अस्पताल के डॉक्टरों ने 69 वर्षीय मरीज को मिट्राक्लिप तकनीक के जरिये उपचार किया। दावा है कि ऐसा देश में पहली बार हुआ है। मरीज के वॉल्व से भारी रिसाव के कारण उन्हें सांस फूलने और हार्ट फेल होने की शिकायत थी। 
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इस इलाज के लिए डॉक्टरों ने लॉस एजेंल्स के स्मिट हार्ट इंस्टीट्यूट सेडार्स सिनाइ हार्ट सेंटर के वरिष्ठ डॉ. प्रोफेसर सैबल कारए की मदद भी ली। डॉक्टरों की मानें तो मरीज को बार-बार हार्ट फेलियर की शिकायत होने के कारण ऑपरेशन नामुमकिन था। 

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कैथेटर आधारित नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया   

13 साल पहले ही बायपास (ओपन हार्ट) सर्जरी हो चुकी थी। हाल में उनका हार्ट फूलने लगा था जो कि वॉल्व में रिसाव का परिणाम था। ऐसे मरीजों में वॉल्व की मरम्मत की जाती है या उसे बदला जाता है,  लेकिन अक्सर यह सर्जरी काफी जोखिम भरी होती है और कई बार ऐसे मामलों में मरीज को कोई फायदा भी नहीं मिलता। 

लिहाजा इस मामले में डॉक्टरों ने उनके लिए मिट्राक्लिप प्रोसीजर चुना जो कि सफल रहा है। वहीं प्रोफेसर सैबल कार ने तकनीक को लेकर बताया कि न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित सीओएपीटी परीक्षण से यह साबित हुआ है कि मिट्राक्लिप प्रोसीजर से न सिर्फ मरीज की हालत बल्कि उसे 2 साल से अधिक का जीवनदान भी मिलता है। 

चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ ने बताया कि मिट्राक्लिप तकनीक दरअसल हृदय के भीतर स्थित वाल्व की मरम्मत करने की कैथेटर आधारित नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें मरीज के ग्रॉइन के भीतर एक बड़ी रक्तवाहिका से स्पेशल कैथेटर को हार्ट के दाएं चैंबर से होते हुए बाएं चैंबर में डाला जाता है।

हालांकि ऐसा करने के लिए दोनों के बीच मौजूदा पार्टिशन में छेद करना पड़ता है। इसके बाद इकोकार्डियोग्राफी और एक्स-रे की मदद से उस वाल्व पर एक क्लिप लगाई जाती है, जिससे रिसाव हो रहा होता है। मरीज को आमतौर पर 24-48 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाती है।

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