MCD Election: कूड़े के पहाड़ खत्म करना नए नेतृत्व की होगी चुनौती, नगर निगम में 15 साल से काबिज है भाजपा
दिल्ली में हर दिन करीब 11,000 टन से अधिक कचरा पैदा होता है। एमसीडी का दावा है कि इसमें से रोज 8,000 टन से अधिक कचरे का निपटान किया जा रहा है। मौजूदा समय कूड़े का सबसे बड़ा हिस्सा ओखला, तेहखंड, गाजीपुर और बवाना में वेस्ट टु एनर्जी प्लांट में जा रहा है।
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लैंडफिल साइटों पर जमा कचरा खत्म करना एमसीडी के नए नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। एमसीडी में पिछले 15 साल भाजपा सत्ता में रही। एक बार फिर निगम का चुनाव आ गया है। ऐसे में विपक्ष कूड़े के पहाड़ को मुद्दा बना रही है। ऐसे में सभी पार्टियां अपने-अपने दावे कर रही है।
आप ने कूड़े पर 20 नवंबर तक संवाद कार्यक्रम शुरू किया है। पार्टी नेता कचरे के समाधान के विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष रख रहे हैं। वहीं, भाजपा ने एमसीडी में किए अपने कार्यों को जनता तक पहुंचाने के लिए 30 प्रचार रथ तैयार किए हैं। भाजपा का दावा है कि कूड़े के पहाड़ों को हटाने की सामर्थ्य केवल उन्हीं में है। वहीं, कांग्रेस नेतृत्व के केंद्र में भी तीनों लैंडफिल साइटों की सफाई ही है।
लैंडफिल साइट पर जा रहा 27 फीसदी कचरा
दिल्ली में हर दिन करीब 11,000 टन से अधिक कचरा पैदा होता है। एमसीडी का दावा है कि इसमें से रोज 8,000 टन से अधिक कचरे का निपटान किया जा रहा है। मौजूदा समय कूड़े का सबसे बड़ा हिस्सा ओखला, तेहखंड, गाजीपुर और बवाना में वेस्ट टु एनर्जी प्लांट में जा रहा है। दूसरा बड़ा हिस्सा टैगोर गार्डेन द्वारका समेत दूसरे कंपोस्ट प्लांट में इस्तेमाल हो रहा है। वहीं प्लास्टिक कचरा एमआरएफ प्लांट में जा रहा है। इसके बावजूद करीब 27 फीसदी कचरा अब भी रोज तीनों साइट पर जमा हो रहा है। घोघा, नांगली और ओखला में तीन बायो सीएनजी प्लांट बनाए जा रहे हैं। अगले साल मार्च तक ये तैयार हो जाएंगे। इसके बाद यहां रोज करीब 700 टन गीला कचरा गलाया जाएगा।
अप्रैल 2024 लैंडफिल खत्म करने की आखिरी तिथि
एमसीडी के मुताबिक गाजीपुर, ओखला और भलस्वा लैंंडफिल साइट पर कुल मिलाकर मौजूदा समय करीब 203 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा है। एमसीडी ने पिछले चार माह में 26.1 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया है। मई 2019 में तीनों लैंडफिल साइट पर करीब 280 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा था। तीन साल के भीतर करीब 77 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया गया है। मौजूदा समय में साइट पर बाॅयो माइनिंग के लिए करीब 44 ट्रॉमल मशीनें लगाई गई हैं। यहां से निकलने वाली इनर्ट (मिट्टी) को निर्माणाधीन साइटों, एनएचएआई के प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा सीमेंट फैक्ट्रियों को आरडीएफ भी देने के लिए समझौता किया गया है। इस प्रकार से निगम ने अप्रैल 2024 तक तीनों लैंडफिल साइटों को समाप्त करने के लिए लक्ष्य तय किया है।
आए दिन दरकते रहते हैं कूड़े के पहाड़
गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइट पर आए दिन कूड़े के पहाड़ दरकते रहते हैं। कुछ साल पहले गाजीपुर में कूड़े के दरकने से बड़ा हादसा हुआ था। इसमें कई लोगों ने जान गंवाई थी। कुछ महीने पहले भलस्वा साइट का कूड़ा दरक कर पास की कॉलोनी की छतों पर जा पहुंचा था। आम आदमी पार्टी के एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने मंगलवार को दावा किया कि गाजीपुर लैंडफिल साइट पर सोमवार को फिर से कचरा दरक कर नीचे आ गया। इस घटना में लोग बाल बाल बचे।
सियासी दलों की प्रतिक्रिया
अब तीनों लैंडफिल साइट की ऊंचाई कम नहीं की जा सकती। इसलिए दिल्ली में कूड़े के 16 नए पहाड़ बना रहे हैं, जिसके लिए हर विधानसभा में जगह ढूंढ रहे हैं। दिल्ली की जनता ऐसा करने वालों की आगामी चुनाव में जमानत जब्त कर देगी। -दुर्गेश पाठक, आम आदमी पार्टी, एमसीडी प्रभारी
दिल्ली में कूड़े की समस्या को दूर करने के लिए वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाए गए हैं। कूड़े के पहाड़ों को हम अगले दो साल में पूरी तरह से खत्म करने जा रहे हैं। कूड़े की राजनीति करने वाले पंजाब में खड़े कूड़े के पहाड़ नहीं खत्म कर पा रहे। -आदेश गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा शासित एमसीडी ने काम किया होता तो दिल्ली में कूड़े के पहाड़ नहीं होते। केजरीवाल सरकार ने भी पिछले आठ साल में दिल्ली को बदहाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, कांग्रेस शीला दीक्षित के कार्यकाल की तरह चमकती दिल्ली बनाएगी। -अनिल कुमार, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष