अतीक के आतंक का अनसुना किस्सा: जब माफिया के डर से थर्राया नोएडा, प्राधिकरण के CEO को दो घंटे बनाया था बंधक
18 वर्ष पहले नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को उनके ही सरकारी बंगले में बंधक बना कर रखा था। अतीक ने उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया था। लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते उसके खिलाफ तब कार्रवाई नहीं हुई थी।
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उत्तर प्रदेश में अपराध की दुनिया में अतीक अहमद के नाम की तूती इस कदर बोलती थी कि आम लोगों के साथ-साथ सरकारी अफसर और रसूखदार लोग भी उससे डरते थे। माफिया अतीक के काले कारनामों में नोएडा का नाम तब जुड़ा, जब उसने करीब 18 वर्ष पहले नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को उनके ही सरकारी बंगले में बंधक बना कर रखा था। उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया था लेकिन अतीक की सफेदपोशों तक पहुंच के चलते मामला रफा-दफा हो गया था। उसने इसी पहुंच और रसूख के दम पर लोगों में अपने नाम की दहशत पैदा की।
यह था मामला
नोएडा प्राधिकरण से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह मामला साल 2005 का है। उस समय उत्तर प्रदेश की कमान सपा के हाथों में थी। बताया जाता है कि उस वक्त नोएडा प्राधिकरण में तैनात सीईओ और माफिया अतीक के बीच एक माफिया के रिश्तेदार को नोएडा में औद्योगिक भूखंड दिलाने को लेकर फोन पर कहासुनी हो गई थी। अतीक की नाजायज बात को जब चेयरमैन ने अनसुना कर दिया तो अतीक आग बबूला हो गया था। इसके बाद अतीक अपने कुछ साथियों के साथ नोएडा स्थित सेक्टर 14ए प्राधिकरण के सीईओ के सरकारी आवास पर जा धमका। वहां सीईओ के अलावा कई अधिकारी पहले से मौजूद थे।
बिना पूर्व अनुमति के चलते अतीक को सीईओ से मिलने नहीं दिया गया। इस दौरान उसने भूमि आवंटन की बात रखी, पर जब अधिकारियों ने असमर्थता जाहिर की तो वह गुस्से से तिलमिला गया और उनके साथ अभद्रता की। इसके बाद भय के चलते सीईओ ने अतीक और उसके गुर्गों से कहलवा दिया कि वे वहां नहीं हैं। जबकि वह बंगले के एक कमरे में छिपे थे। बताया जाता है कि सीईओ ने करीब दो घंटे तक खुद को बंद रखा था। काफी देर बाद तक इंतजार करने के बाद अतीक अंदर गया और सीईओ को परिवार के सामने ही बुरा-भला कहा। इसके बाद धमकाते हुए अतीक वहां से चला गया।
नोएडा सीईओ को धमकाने के बाद अधिकारियों में व्याप्त हो गया था भय
नोएडा में सीईओ के धमकाने के बाद उत्तर प्रदेश के अधिकारियों में भी अतीक के नाम का भय व्याप्त हो गया था। अतीक के खिलाफ नोएडा के कुछ अधिकारी लामबंद हुए और कार्रवाई की जोरदार मांग भी की थी। लेकिन सत्ता में पहुंच के चलते अतीक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई थी।