अधिकारों की लड़ाई में आमने सामने केंद्र और दिल्ली सरकार, सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
केंद्र सरकार बनाम दिल्ली सरकार की अधिकारों को लेकर जारी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की एक याचिका पर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को याचिका वापस लेना को कहा और पूछा कि, धारा 131 सिविल सूट के तहत मामले की सुनवाई क्यों ना की जाए? कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि एक जैसे दो मामले एक साथ कोर्ट में नहीं चल सकते और जब हाइकोर्ट ने मेरिट पर फैसला सुनाया है तो उसके खिलाफ अर्जी दाखिल कीजिए। इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
अप्रैल में दायर की गई इस याचिका में दिल्ली सरकार ने कहा है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य जैसा अधिकार मिले और सुप्रीम कोर्ट अधिकारों की इस लड़ाई का फैसला करे।
दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने सूट का विरोध करते हुए कहा कि दिल्ली राज्य नहीं है केंद्रशासित प्रदेश है। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को झटका देते हुए कहा था कि एलजी ही दिल्ली के प्रशासक हैं और आप खुद को राज्य कैसे कह सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सूट वापस लेने को कहा
दिल्ली सरकार के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि सूट वापस लेने के बारे में सरकार से सलाह लेंगे और हाईकोर्ट के आदेश को दो दिन में चुनौती भी देंगे। दूसरी ओर केजरीवाल सरकार सूट दाखिल करने के साथ-साथ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती भी देगी।
संविधान में आर्टिकल 131 का हवाला देते हुए दिल्ली सरकार की दलील है कि भारत में दो या दो से अधिक राज्यों या केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच कोई विवाद होगा तो सिर्फ सुप्रीम कोर्ट को ही उसका निपटारा करने का अधिकार होगा हाईकोर्ट ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं कर सकता।
केंद्र और दिल्ली सरकारों के अधिकार का बंटवारा संविधान में 239AA में किया गया है। केंद्र दिल्ली सरकार के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहा है। केंद्र सरकार के पास भूमि, पुलिस और पब्लिक आर्डर है तो बाकी मामलों में फैसले लेने का अधिकार दिल्ली सरकार को है और इसके लिए LG की इजाजत लेना जरूरी नहीं है।