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इस विधेयक संशोधन से निजी स्कूलों पर नकेल कसेगी सरकार

Wed, 18 Nov 2015 04:36 AM IST
Updated Wed, 18 Nov 2015 04:36 AM IST
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by bill amend government will set up rein on private schools

शिक्षा के नाम पर अपनी जेब भर रहे निजी स्कूलों पर दिल्ली सरकार ने नकेल कसने की तैयारी कर ली है। दिल्ली सरकार निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली शिक्षा एक्ट संशोधन बिल लाने जा रही है, जिसमें स्कूलों में डोनेशन, दाखिला प्रक्रिया, शिक्षकों के न्यूनतम वेतन पर सरकार निगरानी करेगी।

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पकड़े जाने पर स्कूलों पर लाखों रुपये जुर्माने के साथ जेल जाने तक का प्रावधान किया जा रहा है। यही नहीं शिक्षा के गिरते स्तर को देखते हुए सरकार आठवीं तक लागू नो डिटेंशन पॉलिसी को भी खत्म करने की सिफारिश केंद्र सरकार से करेगी। एक्ट में संशोधन का यह बिल बुधवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में लाया जाएगा।
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संशोधन बिल में दाखिले के दौरान स्कूलों द्वारा किसी भी तरह से लिए जाने वाले डोनेशन पर सजा का प्रावधान होगा। वह स्कूल चाहे सीधे ले या फिर किसी दूसरी संस्था या ट्रस्ट के नाम पर ले।
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पकड़े जाने पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। इसी तरह अगर दाखिले के वक्त बच्चे या अभिभावक का इंटरव्यू लिया गया तो पहली गलती पर स्कूल को पांच लाख रुपये। दोबारा पकड़े जाने पर दस लाख रुपये का जुर्माना होगा। साथ ही तीन साल तक सजा का भी प्रावधान किया गया है।

नो डिटेंशन पॉलिसी होगी खत्म

by bill amend government will set up rein on private schools

दिल्ली सरकार आठवीं तक लागू नो डिटेंशन पॉलिसी (छात्र आठवीं तक फेल नहीं किया जाता है) को खत्म करने की सिफारिश करेगी। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है।

सरकार ने पाया है कि आठवीं के बाद जब बच्चा नौवीं में पहुंचता है तो वह फेल हो जाता है। यह इस पॉलिसी के बाद से नौवीं में फेल होने वालों की संख्या बढ़ी है। इसलिए सरकार चाहती है हर क्लास में परीक्षा हो। इसे खत्म करने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करेगी।

सरकार स्कूलों के खातों की सालाना जांच करेगी। जांच के बाद पूरे खाते को ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए सरकार सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन करेगी।

जांच के लिए प्रत्येक तीन से चार निजी स्कूलों पर एक सीए की नियुक्ति होगी। वह स्कूलों के खातों की जांच करेगा। वह पता करेगा की स्कूल का पैसा फर्जी बिल या अन्य माध्यमों से डायवर्ट तो नहीं किया जा रहा है।

निजी स्कूलों के शिक्षकों की न्यूनतम सैलरी होगी तय

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अगर गड़बड़ी पकड़ी गई तो उसके आधार पर कमेटी के पास अधिकार होगा कि वह अगले साल की फीस तय कर पाएगी। ज्यादा लिया गया पैसा स्कूल को वापस करना पड़ेगा।

मौजूदा दिल्ली शिक्षा एक्ट के मुताबिक, निजी स्कूलों को भी सरकार के बराबर ही शिक्षकों को सैलरी देनी चाहिए, जिसके चलते स्कूल शिक्षकों से ज्यादा सैलरी पर साइन तो कराते हैं पर देते बेहद कम हैं।

कई स्कूलों में शिक्षक चार से पांच हजार रुपये में भी काम करते हैं। सरकार अब संशोधन कर इस एक्ट में बदलाव करेगी। मसलन सरकार के बराबर तो नहीं लेकिन शिक्षकों के स्किल, अनुभव के आधार पर उसका न्यूनतम सैलरी सरकार तय करेगी। यह कम से 12 हजार या इससे ज्यादा होगा।

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