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शिल्पियों की जगह व्यापारियों का हुआ सूरजकुंड मेला

Wed, 12 Feb 2014 12:20 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 12 Feb 2014 12:20 PM IST
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businessman takes over surjkund mela from craftsman

1987 में जब दिल्ली से सटे अरावली की वादियों में सूरजकुंड क्रॉफ्ट मेला लगावाया गया होगा तो उसके आयोजकों को अंदाजा नहीं होगा कि भविष्य में कुछ लोग इसे व्यापारियों का मेला बना देंगे।

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दरअसल यह मेला इसलिए लगवाया गया था ताकि देश के कोने-कोने से शिल्पकार और नामचीन बुनकर यहां आकर अपनी कला का प्रदर्शन करें और उससे उनकी रोजी रोटी चले। लेकिन 21वीं सदी में आकर अब इस मेले का मकसद अघोषित रूप से बदल दिया गया है। असली कलाकार हाशिए पर हैं और कपड़ों एवं आर्टिफिशियल ज्वैलरी के व्यापारी तवज्जो पा रहे हैं।
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मेला कहने को अंतरराष्ट्रीय हो गया है लेकिन कलाकार परेशान हैं। मेले में आए असली शिल्पियों की परेशानी जानने के बाद अमर उजाला ने हरियाणा पर्यटन निगम के अधिकारियों की कारगुजारियों को सामने लाने की कोशिश की। पेश है संवाददाता ओम प्रकाश की लाइव रिपोर्ट:
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बेकद्री के शिकार शिल्पी, पैसे लेकर दी जगहSurajkund report
मेले में बिहार के मधुबनी जिले से आईं गौरी देवी विकलांग हैं। वह मधुबनी पेंटिंग में स्टेट अवार्डी हैं। यहां 28 जनवरी को आ गई थीं, लेकिन मेले में एंट्री मिली 9 फरवरी को। वह भी किसी अधिकारी को पैसे देकर। गौरी देवी को ढंग की जगह नहीं दी गई तो उनकी कला और दयनीय हालत देखकर कुछ नेशनल अवार्डी कलाकारों ने उन्हें जगह दिलाई।

कला के नाम पर मशीनी सामान
हस्तशिल्प मेले में कला के नाम पर कपड़े ज्यादा बिक रहे हैं वह भी दिल्ली के जनपथ वाले। असली बुनकर कोने में हैं और सामान्य कपड़े बेचने वाले जहां जगह मिली वहीं बैठ गए हैं। इसीलिए सभी स्टॉलों पर नंबर और परिचय तक नहीं लिखा गया है।Surajkund report

सवाल यह उठता है कि स्टेट एवं नेशनल अवार्डियों के मेले में आम मशीनी कपड़े क्यों बिक रहे हैं। कुछ अधिकारियों के जुगाड़ से स्टॉलों के बीच अस्थाई स्टॉल लगवा दिए गए हैं। पैसे के बल पर जिसको जहां मर्जी वहीं बैठ गया। एक ने तो फूड कोर्ट जाने वाला रास्ता ही घेर लिया है। एक ने तो सेल भी लगा दी है। इसका कुछ शिल्पियों ने विरोध किया लेकिन इस अंधेर नगरी में भला कलाकारों की कौन सुने।

राष्ट्रीय अवार्डी एवं शिल्प गुरुओं ने कहा अब नहीं आएंगे सूरजकुंड
शिल्पियों के सबसे बड़े सम्मान, शिल्प गुरु से सम्मानित मोहम्मद फारुक कहते हैं कि कलाकारों को बहुत खराब जगह दी गई है जबकि ट्रेडर्स को अच्छी। मेला आयोजन से जुड़े कुछ लोगों ने इसकी मूलभावना से खिलवाड़ शुरू कर दिया है। यही हाल रहा तो यहां भविष्य में आना मुश्किल होगा।

नेशनल अवार्डी वैदिक आर्टिस्ट रामू रामदेव ने कहा कि मैं यहां पर पहली बार आया हूं। यहां अधिकांश नेशनल अवार्डी कलाकारों के साथ अन्याय हो रहा है। यह मेला बाजार हो चला है। अब यहां कभी नहीं आउंगा। असली कलाकार तो मेले के हाशिए पर हैं। गैर अवार्डी लोगों की भरमार है जो कपड़े और ज्वैलरी बेच रहे हैं।Surajkund report


शिल्प गुरु प्रदीप मुखर्जी ने कहा कि मैं 1987 में इसके पहले मेले में आया था। उसके बाद अब आया हूं। सुना था काफी अच्छा हो गया है मेला लेकिन यहां आने पर पता चला कि अवार्डी कलाकार बेकद्री के शिकार हैं। लोग पैसे वालों के चक्कर में धक्के खा रहे हैं। इस मेले से क्रॉफ्ट शब्द हटाकर सिर्फ सूरजकुंड मेला कर देना चाहिए। क्रॉफ्ट की जगह जुगाड़ तंत्र का कब्जा है।

नेशनल अवार्डी कल्याणमल साहू ने कहा कि यह सूरजकुंड नहीं बल्कि जनपथ लग रहा है। अब यहां फिर नहीं आना चाहंूगा। कलाकारों की हट्स में उनका परिचय आधा मेला खत्म होने के बाद लगाया गया है।

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