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दिल्ली: फर्जीवाड़ा कर 30 करोड़ का लोन लेने वाला करोबारी गिरफ्तार, जांच में जुटी पुलिस

Wed, 24 Jul 2019 02:03 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Wed, 24 Jul 2019 02:03 PM IST
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Businessman arrested for taking loan worth 30 crore on fake documents
loan

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बैंक लोन जालसाजी में शालीमार बाग निवासी कारोबारी सिद्धार्थ जैन (39) को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने दूसरे की प्रॉपर्टी के फर्जी कागजात बनवाकर राष्ट्रीयकृत बैंक से करीब 30 करोड़ रुपये का लोन ले लिया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन के अनुसार, एसीपी अरविंद कुमार यादव की देखरेख में इंस्पेक्टर रंजय अतरिशया की टीम बनाई गई। सेवानिवृत्त कर्नल लव कुमार ओझा (77) ने रानी बाग में जालसाजी का मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि जमीन पर कब्जा करने वालों ने को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लि. सरस्वती विहार स्थित उसके प्लाट पर कब्जा कर लिया है। 
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जांच में ये भी पता लगा कि इस प्लाट की मूल फाइल डीडीए से गायब हो गई है। इस बाबत कोटला मुबारकपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था। दोनों मामलों की जांच रिपोर्ट दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपी गई। पुलिस को जांच में ये पता लगा कि को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लि. सरस्वती विहार, दिल्ली स्थित कर्नल के प्लाट का मालिक सिद्धार्थ जैन बन गया और उसने प्लाट के कागजातों से राष्ट्रीयकृत बैंक से 7 करोड़ रुपये का लोन ले लिया है। 
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इसी तरह उसने रोहित कुंज, प्रीतमपुरा में स्थित एक प्लाट के कागजों से 6 करोड़ का लोन ले लिया। दोनों ही बैंकों की सेल्स डीड कभी रजिस्टर्ड नहीं हुई थी और सेल्ट ट्रांजेक्शन भी नहीं हुई थी। सभी कागजात फर्जी थे। बैंकों ने कागजों का सत्यापन नहीं किया था। व्यवसायी ने इसी तरह मॉडल टाउन स्थित एक प्रॉपर्टी की एवज में 11 करोड़ का लोन ले लिया था। 



इस तरह उसने अन्य प्रॉपर्टी पर भी  कुल 30 करोड़ रुपये का ऋण लिया। बैंक लोन को वापस करने की उसकी मंशा भी नहीं थी। सिद्धार्थ जैन का बाल्को व अन्य प्राइवेट ऑपरेटर्स को मेटल सप्लाई करने का व्यवसाय है। सीबीआई ने वर्ष 2011 में इस तरह जालसाजी के केस में चार्जशीट दायर की थी। इसमें सिद्धार्थ जैन 3 करोड़ रुपये के बैंक लोन गारंटर था। राजौरी गार्डन थाना पुलिस ने उसे वर्ष 2004 में 12 लाख रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।

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