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Justice Yashwant Varma: जस्टिस यशवंत वर्मा के घर के बाहर मिला जला हुआ मलबा; इसमें 500 रुपये का जला हुआ नोट भी

Sun, 23 Mar 2025 02:04 PM IST
विजय पुंडीर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 23 Mar 2025 02:04 PM IST
सार

न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के घर के बाहर का एक नया वीडियो सामने आया है। उनके आवास के पास जला हुआ मलबा देखा गया। जिसमें जला हुआ 500 का नोट भी मिला है।

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Burnt debris seen on the premises of the residence of Delhi High Court judge Justice Yashwant Varma
जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास के बाहर मिला 500 रुपये का जला हुआ नोट - फोटो : ani

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। अब उनके घर के बाहर का एक नया वीडियो सामने आया है। उनके आवास के पास जला हुआ मलबा देखा गया। जिसमें जला हुआ 500 का नोट भी मिला है। जिसके बाद यह मामला काफी पेचीदा हो गया है।

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उधर, जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों से साफ इनकार किया है और दावा किया है कि स्टोररूम में उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य के द्वारा कोई नकदी नहीं रखी गई। जस्टिस वर्मा ने कहा कि उन्हें बदनाम करने की साजिश हो रही है। दरअसल मुख्य न्यायाधीश ने नकदी मिलने के मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। जिसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने जस्टिस वर्मा से उनके ऊपर लगे आरोपों पर जवाब मांगा था।

जस्टिस डीके उपाध्याय को भेजे पत्र में जस्टिस वर्मा ने लिखा कि 'मेरे या मेरे परिवार के किसी सदस्य को स्टोर रूम में मिली नकदी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न ही मेरे या मेरे परिवार को ये नकदी दिखाई गई।' जस्टिस वर्मा ने घटना को याद करते हुए बताया कि '14-15 मार्च की रात उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगी। यह स्टोर रूम उनके स्टाफ क्वार्टर के पास स्थित है। स्टोर रूम को आम तौर पर इस्तेमाल न होने वाले फर्नीचर, बोतल, क्रॉकरी, इस्तेमाल किए हुए कारपेट आदि रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही उस स्टोर रूम में सीपीडब्लूडी का सामान भी रखा रहता है। स्टोर रूम में कोई ताला नहीं है और वहां कई अधिकारी आते जाते रहते हैं। इस स्टोर रू में सामने के दरवाजे से और पीछे के दरवाजे से भी आया जा सकता है। यह मेरे आवास से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ नहीं है और यह मेरे घर का हिस्सा नहीं है।'

जस्टिस वर्मा ने बताया कि 'जिस दिन आग लगने की घटना हुई, उस दिन वे अपनी पत्नी के साथ मध्य प्रदेश में थे। उस वक्त घर पर सिर्फ मेरी बेटी और मेरी बुजुर्ग मां ही घर पर थीं। मैं 15 मार्च की शाम को भोपाल से दिल्ली लौटा। जब आग लगी तो मेरी बेटी और मेरे निजी सचिव ने फायर ब्रिगेड को फोन किया। आग बुझाने के दौरान मेरे सारे स्टाफ और मेरे घर के सदस्यों को आग वाली जगह से हटा दिया गया था। जब आग बुझ गई और जब ये लोग वहां पहुंचे तो मौके पर कोई नकदी नहीं थी। मैं फिर एक बार साफ कर दूं कि न तो मेरे द्वारा या मेरे परिवार के द्वारा कोई नकदी स्टोर रूम में रखी गई थी और न ही कथित तौर पर मिली नकदी से हमारा कोई संबंध है। ये पैसा हमारे द्वारा रखे जाने का दावा पूरी तरह से हास्यास्पद है।' उन्होंने कहा कि एक ऐसी जगह पर नकदी रखने का विचार ही बेतुका है, जहां सब लोग आ जा सकते हैं।

जस्टिस वर्मा नकदी मिलने की बात से ही इनकार कर रहे हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार की शाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक वीडियो जारी की, जिसमें जस्टिस वर्मा के आवास से मिले जले हुए नोटों की गड्डियां दिख रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की आंतरिक जांच शुरू करने का दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच तक जस्टिस यशवंत वर्मा को कोई भी न्यायिक जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपलोड वीडियो पर जस्टिस वर्मा ने कहा कि 'मैं वीडियो की सामग्री को देखकर हैरान हूं क्योंकि उसमें कुछ ऐसा दिखाया गया है, जो मौके पर मिला ही नहीं।' 

बता दें कि न्यायमूर्ति वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में 14 मार्च को होली की रात करीब 11.35 बजे आग लगने के बाद भारी मात्रा में नकदी मिलने का दावा किया गया था। दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई थी।

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