केजरीवाल को बस्सी ने दी खुली बहस की चुनौती
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दिल्ली पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को खुली बहस की चुनौती दी है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि रोहिणी में फ्लैट को लेकर उन पर जो आरोप लग रहे हैं उस पर वह मुख्यमंत्री से सीधी बहस को तैयार हैं।
अगर मुख्यमंत्री को उनसे लड़ना है तो कानून के मुताबिक लड़ें। मुख्यमंत्री ने कसम खा रखी है कि वह गैरकानूनी तरीके से ही लड़ेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय उनके खिलाफ झूठे सबूत एकत्रित कर रहा है।
आरोपों से तिलमिलाए पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भड़ास निकाली। पुलिस मुख्यालय में बुलाई प्रेस वार्ता में पुलिस आयुक्त ने कहा कि जो दिल में होता है वह उनकी जुबान पर होता है।
ऊंचे पदों पर बैठे लोग गरीबों के मसीहा बनते हैं मगर वह झूठ का पुलिंदा के अलावा कुछ और नहीं हैं। वह सच के अलावा कुछ नहीं बोलते। मुझ में सच्चाई का साथ देने की हिम्मत है। हमेशा गरीबों का आंसू पूछने की हिम्मत करता हूं। आम नागरिकों की सहायता करता हूं।
आरोप और उनके जवाब
मैंने फ्री रजिस्ट्रेशन कराया, इसका नतीजा ये है कि वर्ष 2012 में जहां अपराध 60 हजार दर्ज होते थे, अब एक लाख 80 हजार हैं। लोग धक्केखाते थे, गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं होती थी। सिस्टम को बदला है। कुछ लोग मगरमच्छ केआंसू बहाते हैं।
दिल्ली में रोड की डिजाइन ठीक नहीं है इस कारण सड़क दुर्घटनाओं में ज्यादा लोग मरते हैं। दिल्ली में अच्छे-अच्छे पदों पर बैठे लोगों को समस्याओं का पता नहीं है। उन्होंने इस दौरान श्लोक भी बोले जिसका मतलब है कि काम करो, फल की चिंता मत करो।
पहला कि वह गलत तरीके से रोहिणी स्थित सोसायटी की सदस्य बने। दूसरा, ग्रेटर नोएडा में सोसायटी की सदस्यता गलत तरीके से ली। तीसरा, जब उन्होंने अपना फ्लैट भाई को बेचा तो स्टांप ड्यूटी चुराई और चौथा, भाई की सोसायटी में रहने वाले लोग उनसे डरते हैं।
उन्होंने सफाई पेश की कि वे 1999 में सदस्य बने थे। उन्होंने अपने महकमे से लोन लेकर रोहिणी में फ्लैट खरीदा था। फ्लैट कानून के मुताबिक मिला था।
विशेष उल्लेख की कुर्बानी
उधर, दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी के खिलाफ फ्लैट आवंटन में धोखाधड़ी का मामला उठाने के लिए विशेष उल्लेख के मामलों की कुर्बानी दे दी गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने बेशक कार्यवाही की शुरुआत में विशेष उल्लेख के सभी मामलों को पढ़ा हुआ मानने की रूलिंग दी, लेकिन अगले ही क्षण खड़े हुए सौरभ भारद्वाज को पुलिस आयुक्त की शिकायत का मामला उठाने की पूरी छूट दी।
इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष समेत आधा दर्जन से अधिक विधायकों ने अपनी बात रखी। इसमें 45 मिनट का समय खर्च हुआ। दिल्ली विस में वैट अमेंडमेंट बिल पेश करके चर्चा होनी थी। फिर सत्र के सबसे महत्वपूर्ण बिल ‘दिल्ली जनलोकपाल बिल’ पर चर्चा की जानी थी।
लंबी चर्चा का तर्क देकर ही विशेष उल्लेख खत्म किया गया था, लेकिन जब सौरभ भारद्वाज ने मामला उठाना शुरू किया, तो यह समझ में नहीं आया कि कितने महत्व का विषय था। शिकायत पर पहले से मामले में जांच चल रही थी।
सीएमओ पर झूठे सबूत एकत्रित करने का आरोप
उपमुख्यमंत्री ने अपने जबाव में भी यही कहा कि जांच चल रही है। इस मामले में विस अध्यक्ष रामनिवास गोयल का कहना है कि अगर कोई महत्वपूर्ण मामला होता है, तो संवैधानिक दायरे में अनुमति दी जाती है। यह मामला महत्वपूर्ण था।
भीमसेन बस्सी ने कहा कि उन्हें पता लगा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में कुछ लोग उनके खिलाफ सबूत एकत्रित कर रहे हैं। लोग सोसायटी के कार्यालय में एक सप्ताह से जा रहे हैं और जबरदस्ती कागज मांग रहे हैं। कार्यालय में बैठे लोग गैरकानूनी काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा सच बोलने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। नासमझी का काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की लड़ाई उनकी खुद से है। ये जनता का दुर्भाग्य है कि लोग मर रहे हैं। यमुना बाजार की पटरी पर गरीब मर रहा है। बसों में डिलीवरी हो रही है। झुग्गियों में बच्चे भूखे मर रहे हैं।