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Delhi NCR News: सर्जरी के दो दिन बाद सांसों पर संकट, मशीन से निकाला थक्का
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फेफड़ों में जमा हो गया खून का जानलेवा थक्का, अचानक गिरा बीपी और ऑक्सीजन लेवल
डॉक्टरों ने इमरजेंसी थ्रोम्बेक्टॉमी कर 47 वर्षीय महिला की बचाई जान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने 47 वर्षीय महिला के फेफड़ों में जमा जानलेवा खून का थक्का मशीन की मदद से निकालकर उसकी जान बचा ली। महिला की बच्चेदानी में 18 हफ्ते के आकार की गांठ (फाइब्रॉइड) थी। इसके कारण उसे काफी खून की कमी हो गई थी। डॉक्टरों ने हिस्टेरेक्टॉमी कर बच्चेदानी निकाल दी। ऑपरेशन के बाद महिला सामान्य रूप से ठीक हो रही थी, लेकिन दूसरे दिन वॉशरूम जाते समय अचानक उसे चक्कर आया और उसका ब्लड प्रेशर व ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिर गया।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुलिका सिन्हा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड में स्थिति सामान्य दिखी, लेकिन टूडी इको में दिल के दाहिने हिस्से पर दबाव नजर आया। इसके बाद तुरंत कार्डियोलॉजी टीम को बुलाया गया। सीटी एंजियोग्राम में फेफड़ों की नस में बड़ा खून का थक्का मिला। स्थिति को देखते हुए इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी टीम के डॉ. अभिषेक बंसल ने तत्काल मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी की। इस प्रक्रिया में मशीन की मदद से थक्के को निकाल दिया गया और महिला की हालत तेजी से संभल गई।
अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. आशिष चौधरी ने कहा कि पल्मोनरी एम्बोलिज्म बेहद गंभीर स्थिति है, जो कुछ ही मिनटों में जान ले सकती है। सर्जरी, कार्डियोलॉजी, आईसीयू और रेडियोलॉजी टीम के बीच तेज समन्वय से मरीज को बचाना संभव हुआ।
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डॉक्टरों ने इमरजेंसी थ्रोम्बेक्टॉमी कर 47 वर्षीय महिला की बचाई जान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने 47 वर्षीय महिला के फेफड़ों में जमा जानलेवा खून का थक्का मशीन की मदद से निकालकर उसकी जान बचा ली। महिला की बच्चेदानी में 18 हफ्ते के आकार की गांठ (फाइब्रॉइड) थी। इसके कारण उसे काफी खून की कमी हो गई थी। डॉक्टरों ने हिस्टेरेक्टॉमी कर बच्चेदानी निकाल दी। ऑपरेशन के बाद महिला सामान्य रूप से ठीक हो रही थी, लेकिन दूसरे दिन वॉशरूम जाते समय अचानक उसे चक्कर आया और उसका ब्लड प्रेशर व ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिर गया।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुलिका सिन्हा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड में स्थिति सामान्य दिखी, लेकिन टूडी इको में दिल के दाहिने हिस्से पर दबाव नजर आया। इसके बाद तुरंत कार्डियोलॉजी टीम को बुलाया गया। सीटी एंजियोग्राम में फेफड़ों की नस में बड़ा खून का थक्का मिला। स्थिति को देखते हुए इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी टीम के डॉ. अभिषेक बंसल ने तत्काल मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी की। इस प्रक्रिया में मशीन की मदद से थक्के को निकाल दिया गया और महिला की हालत तेजी से संभल गई।
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अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. आशिष चौधरी ने कहा कि पल्मोनरी एम्बोलिज्म बेहद गंभीर स्थिति है, जो कुछ ही मिनटों में जान ले सकती है। सर्जरी, कार्डियोलॉजी, आईसीयू और रेडियोलॉजी टीम के बीच तेज समन्वय से मरीज को बचाना संभव हुआ।
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