वेब के दौर में भी हर उम्र के लोगों में दिखा किताबी प्रेम
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ई-बुक्स के दौर भी किताबों खरीदकर पढ़ने का प्रेम अभी कम नहीं हुआ है। रविवार को दिल्ली पुस्तक मेले में पहुंची भीड़ कम से कम यहीं बयां कर रही थी।
बुजुर्ग हो या महिला, युवा हो या दस साल तक के बच्चे हर वर्ग पुस्तक मेले में अपने मतलब की चीज तलाशते नजर आ रहे थे। कोई कहानी खरीद रहा तो कोई कैरियर से जुड़ी किताबें तो युवा अपने लिए ऑटोबायोग्राफी पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे।
पुस्तक मेले में रविवार छुट्टी वाला दिन होने के कारण हाउसफुल रहा। पुस्तक मेले में सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं की किताबों भी उपलब्ध है। यही नहीं फ्रेंच जर्मन बुक स्टोर भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
ऑटोबायोग्राफी और मोटिवेशनल पुस्तकों का क्रेज
खास बात यह है कि इस बार मेले में प्रकाशक कम मूल्यों की किताबों के साथ आए है। यही वजह है कि मेले में 50, 70, 100 रुपये की किताबें भी मिल रही है। मेले में खासतौर से अभिभावकों व कॉलेज जाने वाले युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है।
अभिभावक अपने अलावा अपने बच्चों के पढ़ाई, मतलब की पुस्तक सामग्री को तलाशने में जुटे है। चाइल्ड एजुकेशन पर काम करने वाले प्रकाशकों के काउंसलर्स से भी सलाह ले रहे है।
रविवार को बच्चे भी मेले में अपने मोटिवेशनल गुरूओ पर किताबें तलाशते नजर आए। मेले में इस बार प्रधानमंत्री मोदी और स्वर्गीय कलाम सर की किताबें की मांग भी दिख रही है।
पुस्तक मेले में शाम बच्चों में बढ़े नशे को लेकर एक नाटक का भी मंचन किया गया। यह मंचन एमिटी की ओर से आयोजित किया गया।