फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Bollywood lyricist Santosh Anand's son and daughter-in-law commits suicide.

इकलौते चिराग के बुझने से टूट गए गीतकार संतोष आनंद

Thu, 16 Oct 2014 11:34 AM IST
Updated Thu, 16 Oct 2014 11:34 AM IST
विज्ञापन
Bollywood lyricist Santosh Anand's son and daughter-in-law commits suicide.

कल भी सूरज निकलेगा, कल भी पंछी गाएंगे, सब तुझको दिखाई देंगे पर हम न नजर आएंगे...। फिल्म प्रेम रोग का यह गीत बेटे की जुदाई पर संतोष आनंद की जिंदगी का हिस्सा बन गया था। हर पल गुनगुनाने वाले संतोष आनंद सांझ के सन्नाटे में तनहा बैठे थे। थोड़े फासले पर उनकी पत्नी थी और दोनों को अपने इकलौते बेटे के पोस्टमार्टम का इंतजार था।

विज्ञापन


मशहूर गीतकार संतोष आनंद के बेटे संकल्प आनंद पत्नी के साथ कोसीकलां में ट्रेन की पटरी पर मौत को गले लगा चुके थे। बुरी खबर सुनकर संतोष आनंद एकदम से टूट गए। 75 की उम्र में इकलौते चिराग की पत्नी संग जग से विदाई उनके लिए वज्रपात थी। कोसी कोतवाली में पुलिस की औपचारिकता पूरी करने के बाद संतोष आनंद शाम 5:45 पर पोस्टमार्टम हाउस कार से परिवारीजनों के संग पहुंचे।
विज्ञापन


सदा मुस्कराते रहने वाले आनंद के लिए जिंदगी की हर घड़ी टूटती नजर आ रही थी। जैसे तैसे दो मिनट में सहारा लेकर वह लड़खड़ाते कदमों के साथ आगे बढ़े। चंद कदम बाद पास रखी कुर्सी पर बैठ गए। 1970 में रिलीज फिल्म पूरब और पश्चिम के पुरवा सुहानी आई रे...गीत से फिल्मी दुनिया में अलग पहचान बनाने वाले संतोष आनंद कुछ न बोलने की स्थिति में थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

'कोई डीएम से कह दीजिए, पोस्टमार्टम जल्दी कराएं'

Bollywood lyricist Santosh Anand's son and daughter-in-law commits suicide.

हर शख्स से संतोष आनंद एक ही बात कह रहे थे कि भैया डीएम से कह दीजिए पोस्टमार्टम जल्दी से जल्दी हो जाए। आसपास खड़े लोगों से भी उनकी यही गुजारिश थी। दो शब्द बोलते ही बार-बार संतोष आनंद फफक कर रोने लगते थे। कुछ देर रुकने के बाद फिर रोते ही खुद ही बोलने लगे, मेरा तो अब सब कुछ खत्म हो गया।

गहरा सदमा उनके हावभाव के साथ चेहरे पर उतर रहा था। अब क्या होगा...जैसे शब्द जीवन के सबसे बड़े दुख को जाहिर कर रहे थे। संतोष आनंद के साथ उनकी पत्नी भी थीं। जीवन की सांझ में सबसे बड़े दुख को वह भी जी रही थीं।

नजदीकी साथी और इनकम टैक्स अफसर सुरेश मित्तल ही पोस्टमार्टम की कार्रवाई में जरूरी औपचारिकता पूरी कराने में लगे थे। सारा जीवन फिल्मी ग्लैमर से चमकते रहने वाले संतोष आनंद पहली बार सबसे उड़ी उदासी में थे। बेटे-बहू की आत्महत्या पर गहरे शोक में डूबे मशहूर गीतकार के इस गम के सिर्फ चंद लोग साथी थे।

मैं बन जाऊं सांस तेरी, तू जीवन बन जा...
संतोष आनंद के गीतों में जिंदगी की झनक और प्रेम का संसार रहता है। साथ ही नैतिकता की राह बताते उनके गीतों की विशेषता है कि आज भी वह उतने ही लोकप्रिय हैं जितने कि 70 के दशक में थे।

रोटी कपड़ा और मकान का गीत मैं न भूलूंगा, मैं न भूलूंगी... में एक लाइन है, मैं बन जाऊं सांस तेरी, तू जीवन बन जा...। आज फिल्मी सीन से जुदा बेटे के परिप्रेक्ष्य में संतोष आनंद की उदासी उनके चेहरे पर यही भाव उतार रही थी। बेटे-बहू का जाना, वीरान घर और पोस्टमार्टम हाउस पर बेसुध से संतोष आनंद को देख सबकी आंखों में आंसू थे।

ट्रेन गुजरते ही खड़ी हो गई रिदिमा

Bollywood lyricist Santosh Anand's son and daughter-in-law commits suicide.

करोड़ों रुपये डूबने की हताशा में संकल्प आनंद ने अपनी पत्नी और बेटी के साथ आत्महत्या करने की ठान ली थी और ट्रेन के आगे जाकर खड़े भी हो गए। कहा जाता है कि ‘जाको राखे साईंयां मार सके ना कोई’, ये कहावत चरितार्थ हुई और संकल्प और उनकी पत्नी नरेश नंदिनी की तो मौत हो गई लेकिन इनकी पांच साल की बेटी रिदिमा ट्रेन गुजरने के बाद उठकर खड़ी हो गई।

प्रत्यक्षदर्शी अमर सिंह का कहना है कि हादसे से एक घंटे पूर्व एक कार से यह दंपति उतरकर ढाबे पर पहुंचा। यहां से पानी की बोतल लेकर वे रेलवे ट्रैक के सहारे पहुंचे। सुबह करीब पौने आठ बजे इंटरसिटी एक्सप्रेस आते ही आनंद दंपति ने पुत्री रिदिमा को लेकर ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। ट्रेन निकलते ही घटनास्थल पर दंपति के चिथडे़ पडे़ थे, लेकिन रिदिमा ट्रैक के बीच में खड़ी हो गई। उसको मामूली चोटें आई हैं।

बुलंदशहर के मूल निवासी थे संतोष आनंद
मृतक संकल्प की मां राजदुलारी ने बताया कि उनके पति संतोष आनंद मूल रूप से बुलंदशहर के सिंकदराबाद के निवासी थे और वह स्वयं बुलंदशहर के गुलावठी की रहने वाली हैं। उनके भाई अभी भी गुलावठी में ही रहते हैं। संतोष आनंद दिल्ली में सरकारी शिक्षक भी थे। फिलहाल करीब 50 वर्ष से अधिक समय से वह दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कालोनी के निकट स्थित सुखदेव विहार में रहते हैं।

वहीं उनका पुत्र संकल्प अपनी पत्नी नंदिनी के साथ करीब दो किमी दूर मयूर विहार में रहता था। बताया कि संकल्प गृह मंत्रालय के रोहिणी स्थित कार्यालय में अधिकारी के रूप में कार्यरत था और उनकी बहू अब नौकरी नहीं करती थी। हालांकि वह शादी से पूर्व फैशन डिजायनर के तौर पर काम करती थी, लेकिन शादी के बाद उसने नौकरी करना छोड़ दिया था।

प्रेम विवाह किया था संकल्प ने
संकल्प की मौत पर रोती उसकी मां राजदुलारी ने बताया कि उनके पुत्र संकल्प ने मूल रूप से बिहार के पटना की रहने वाली नंदिनी से प्रेम विवाह किया था। दोनों शादी के बाद काफी खुश थे। उन्होंने भी काफी मन्नतें मांगी, दर्शन किए। तब जाकर सात वर्ष बाद उन्हें लक्ष्मी के रूप में रिद्धिमा मिली थी। दोनों ही उसे काफी प्यार करते थे।

‘अहोई मइया ने छीन लिया मेरा लाल ...’

Bollywood lyricist Santosh Anand's son and daughter-in-law commits suicide.

बेटे संकल्प आनंद की लंबी आयु के लिए मां राजदुलारी व्रत थीं लेकिन उन्हें क्या पता था कि सुबह 10 बजे के बाद बेटे की मौत की खबर मिल जाएगी। मां की पीर जायज थी और इसीलिए वह अहोई मइया को कोस रहीं थी कि उन्होंने ही बेटे को छीन लिया।

सुबह करीब साढे़ दस बजे मशहूर गीतकार संतोष आनंद की पत्नी और संकल्प आनंद की मां राजदुलारी ने अपनी बहू नंदिनी को फोन किया तो मोबाइल किसी और ने उठाया। इसके बाद जो दुखद सूचना मिली वह उन्हें सन्न कर गई।

रोती बिलखतीं राजदुलारी ने बताया कि साढ़े दस बजे करीब सूचना मिलने के बाद हमलोग पहले लोकल थाने गए। इसके बाद वह कोसी के लिए रवाना हुए। वह पोस्टमार्टम गृह पर सबको बता रही थीं कि उन्होंने अहोई अष्टमी का व्रत रखा है, लेकिन अहोई माता ने उनका बेटा संकल्प ही छीन लिया।

हर दिन आता था बेटे का फोन
राजदुलारी ने बताया कि बेटा संकल्प प्रतिदिन उनसे मोबाइल पर बात करता था। मंगलवार को भी रात में करीब दस बजे बात हुई थी। तब भी ऐसा कुछ आभास नहीं हुआ कि वह ऐसा कोई कदम उठा सकता है। राजदुलारी ने कहा कि उन्हें सुसाइड नोट में लिखे 250 करोड़ रुपये के मामले में कुछ भी पता नहीं है न ही वह सुसाइड नोट में लिखे नामों के व्यक्तियों को जानती हैं।

नंगे पैर दर्शन किए, मांगी मन्नत, तब हुआ था संकल्प

Bollywood lyricist Santosh Anand's son and daughter-in-law commits suicide.

पोस्टमार्टम गृह पर मृतक संकल्प की मां राजदुलारी ने सिसकते हुए बताया कि उनकी शादी के दस वर्ष तक उन्हें कोई बच्चा नहीं हुआ। उन्होंने बच्चे के लिए कई मन्नतें मांगी।

नंगे पैर नगरकोट वाली देवी के दर्शन करने के लिए गए। तब जाकर पुत्र के रूप में संकल्प पैदा हुआ था। इसके बाद फिर दो बेटियां शैली और श्वेता भी हुईं। बताया कि संकल्प अपनी बहनों से बहुत प्यार करता था। पढ़ाई-लिखाई में बहुत ही तेज था और कभी भी किसी से तेज आवाज में बात नहीं करता था। बड़ों का काफी सम्मान करता था।

पुत्र के पैदा होने के साथ ही मिला था अवार्ड
मथुरा। मशहूर गीतकार संतोष आनंद को वर्ष 1975 में चार अप्रैल को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। उसी दौरान उन्हें रोटी कपड़ा और मकान फिल्म में गीत लिखने के लिए भी अवार्ड मिला था। हालांकि अवार्ड का नाम संतोष आनंद की पत्नी राजदुलारी नहीं बता सकीं।

उन्होंने बताया कि उस दौरान सभी प्रमुख समाचार पत्रों में छपा था कि मशहूर गीतकार संतोष आनंद को दो-दो अवार्ड मिले। अवार्ड मिलने की खुशी दस वर्ष बाद हुए पुत्र के कारण दुगुनी हो गई थी। रोते हुए राजदुलारी ने बताया कि आगामी चार अप्रैल को उनका बेटा संकल्प 40 वर्ष का हो जाता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed