जिसने ओबामा और मोदी को भी चमकाया
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"मैंने किसी को सजाकर कोई जुर्म तो नहीं किया। मेकअप कोई भी करे इससे क्या फ़र्क पड़ता है।" ये कहना है दिल्ली में रहने वाली मेकअप आर्टिस्ट चारू ख़ुराना का जो इस हफ़्ते बन गईं भारत की पहली रजिस्टर्ड महिला मेकअप आर्टिस्ट।
वे कहती हैं, "मुझे तो हर महीने पैसा देना पड़ता था ताकि मैं वो कर सकूं जो मुझे पसंद है- लोगों को ख़ूबसूरत बनाना।"
चारू
मुझे ज़लील किया गया
चारू कहती हैं,"मैंने अपनी करियर की शुरुआत दिल्ली में की। मैं विज्ञापन के लिए लोगों का मेकअप करती थी। फिर मैं मुंबई गई और मैंने मुंबई के सिने कॉस्टयूम, मेकअप आर्टिस्ट और हेयर ड्रेसर्स एसोसिएशन का सदस्य बनने की कोशिश की।"
चारू ने बताया,"मैंने अप्लाइ किया तो उन्होंने कहा कि मैं महाराष्ट्र में 15 साल से ज़्यादा नहीं रही हूं इसीलिए मुझे सदस्यता नहीं मिलेगी।"
"बिन सदायस्ता के काम करने का मतलब था कि हर महीने मुझे 1500 रुपये देने होंगे। लेकिन एक दिन हद हो गई जब मैं एक फ़िल्म की शूटिंग कर रही थी। यहां क़रीब 300 लोग आए थे, और शूटिंग रूकवा कर मुझे बेइज़्ज़त किया गया। कारण ये था कि मैं एक महिला होकर मेकअप कर रही थी।"
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
चारू कहती हैं ,"मैंने सोचा कि किसी को सजा कर मैंने कोई जुर्म नहीं किया और मुझे इसके पीछे कोई सही कारण नहीं नज़र आया। इसलिए मैंने अदालत का दरवाज़ा खटखाटाया।"
इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने 59 साल पुराने क़ानून को "संवैधानिक रूप से नाजायज़ और भेदभाव भरा" बताया। यह आश्वासन भी दिया गया कि अगर सिने कॉस्टयूम, मेकअप आर्टिस्ट और हेयर
ड्रेसर्स एसोसिएशन अगली सुनवाई (10 नवंबर) तक एक 'सकारात्मक प्रतिक्रिया'
के साथ वापस नहीं आयी तो यह क़ानून हट जाएगा।
बराक ओबामा का मेकअप
किसी भी मेकअप आर्टिस्ट के लिए बॉलीवुड के अभिनेताओं और अभिनेत्रियों का मेकअप करना उनकी प्रसिद्धि का एक ज़रिया होता है। पर चारु ने बॉलीवुड के साथ-साथ अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी मेकअप किया है।
चारू कहती हैं, "मैंने अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विराट कोहली, अभिषेक बच्चन और कमल हासन के साथ काम किया है। लेकिन अपने काम को मैं हमेशा अपना ना कह पाई पर इस बदलाव की वजह से अब मैं अपने काम को अपना कह सकूंगी।"
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद अगर आप एक महिला मेकअप आर्टिस्ट हैं तो आपको एक फ़िल्म का कॉन्ट्रैक्ट भी मिल सकता है जो पहले सिर्फ़ पुरुष मेकअप आर्टिस्ट को ही मिलता था।
चारु के मुताबिक़ फ़िल्मों के सेट पर अगर ज़्यादा महिलायें होंगी तो महिला कलाकारों को भी अच्छा लगेगा।