ब्लू लाइन पर OHE खराबी से रुकेगी मेट्रो?
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दिल्ली मेट्रो की सबसे व्यस्त ब्लू लाइन (द्वारका से नोएडा/वैशाली) पर अब ओवरहेड वायर (ओएचई) में खराबी के चलते मेट्रो नहीं रुकेगी। डीएमआसी ने ब्लू लाइन के टेक्निकल ऑडिट के साथ इसके इंस्टालेशन के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदा जारी की है।
यानी भारत के अलावा दूसरे देशों की कंपनियां भी इसमें हिस्सा ले पाएंगी। इस पर कुल करीब तीन करोड़ रुपये का खर्च आएगा। वर्तमान में ब्लू लाइन मेट्रो की सबसे बड़ी 51 किलोमीटर लंबी लाइन है। 44 स्टेशन वाली यह लाइन दिल्ली को एनसीआर के दो शहरों नोएडा और गाजियाबाद से जोड़ती है।
अकेले इस लाइन पर पांच इंटरचेंज हैं। यह दूसरी मेट्रो लाइन से भी कनेक्ट करती है। डीएमआरसी की मानें तो इस पर वर्तमान में क्षमता से अधिक यात्री सफर करते हैं। 2016 में इस लाइन पर रोज 9.18 लाख लोगों ने सफर किया था। यह क्षमता से करीब 30 फीसदी अधिक था।
ओएचई में आए दिन समस्या रहती है
वर्तमान में कुछ नई लाइनें खुलने से यात्रियों की संख्या पर फर्क पड़ा है, लेकिन अब भी 7 लाख से ज्यादा लोग रोज सफर करते हैं। इस लाइन का अधिकतम हिस्सा एलिवेटेड है। इससे ओएचई में आए दिन समस्या रहती है। 2017 में ही कई बार यह समस्या आई।
इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब डीएमआरसी ओएचई का ऑडिट कराने के साथ बगैर मेट्रो सेवाएं प्रभावित हुए इसके इंस्टालेशन का विकल्प तलाश रही है। डीएमआरसी के मुताबिक, ओएचई में बार-बार समस्या का कारण लाइन का अधिकतम हिस्सा एलिवेटेड होना है।
खुले में होने के कारण बारिश, पक्षियों के टकराने से भी कई बार समस्या आती है। ऑडिट के जरिए इसकी समस्या पता चलेगी। साथ ही, कंपनियों से पूछा गया है कि वह किस तरह बिना सेवाएं रोके ओएचई बदल सकती हैं।
इस साल पांच बार रुकीं सेवाएं
21 अक्तूबर : ओएचई से जुड़ने वाला पेंटोग्राफ टूटा।
20 सितंबर : द्वारका से द्वारका मोड़ के बीच ओएचई में समस्या।
28 जून : सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन पर ओएचई में समस्या।
13 जून : इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन पर ओएचई में समस्या।
4 जनवरी : ओएचई के इंसूलेटर में पक्षी की वजह से शॉर्ट सर्किट।