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दिल्ली विधानसभा चुनावः अंतिम दौर की नीति में भाजपा ने झोंकी ताकत, बूथ प्रबंधन पर ध्यान
Fri, 07 Feb 2020 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 07 Feb 2020 05:51 AM IST
सार
- बूथ प्रबंधन का काम संगठन महामंत्री, चुनाव प्रबंधन समिति अध्यक्ष व राज्यों के संगठन महामंत्रियों ने संभाला
- चुनाव प्रभारी ने पार्षदों को चुनाव प्रबंधन में जुटने को कहा, संघ के कार्यकर्ता 280 मंडलों में 13 हजार से अधिक बूथों पर रहेंगे तैनात
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भाजपा ने लगाई पूरी ताकत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चुनावी शोर थमने के बाद भाजपा ने बूथ प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित कर लिया है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री से लेकर उत्तर प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा समेत आधा दर्जन राज्यों के प्रदेश संगठन महामंत्री ने इसकी कमान संभाल ली है। वहीं, सभी पार्षदों को फोन कर चुनाव प्रबंधन में जुटने का निर्देश दिया गया है।
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विधानसभा चुनाव में भाजपा इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के चुनाव कमान संभालने की वजह से निचले स्तर के कार्यकर्ताओं तक यह मैसेज भेजा गया है कि प्रचार थम जाने के बाद अब पूरा फोकस बूथ प्रबंधन पर रखें।
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भाजपा का दावा है कि 3.5 लाख के करीब भाजपा कार्यकर्ता बूथ पर तैनात रहेंगे। इसके लिए 30-30 कार्यकर्ताओं की टोली बनाई गई है, जो 13 हजार से अधिक बूथों पर तैनात रहेंगे। सभी मंडल और जिला के भाजपा कार्यकर्ताओं को इसके लिए ट्रेनिंग भी दी गई है।
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उधर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी अपने स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है। संघ के कार्यकर्ता बाहरी राज्यों से भी पहुंचे हैं। उत्तराखंड के मंत्री धन सिंह रावत, मदन कौशिक, विधायक पुष्कर धामी, गणेश जोशी समेत कई वरिष्ठ नेता दिल्ली में प्रवास कर रहे हैं। इन्हें घर-घर जाकर संपर्क करने व बैठक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी तरह अन्य राज्यों से आए हुए संगठन के लोगों को दिल्ली के 280 मंडलों में 13 हजार से अधिक पोलिंग बूथ पर तैनात किया गया है। भाजपा कार्यकर्ता मतदान स्थल तक वोटरों को पहुंचाने में सक्रिय रहेंगे। इनकी नजर अन्य राजनीति पार्टियों के दुष्प्रचार पर भी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि माइक्रो लेवल पर मैनेजमेंट की जा रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी भाजपा कार्यकर्ता मतदाताओं के संपर्क में हैं।
अंतिम दौर में याद आते हैं अनिर्णय की स्थिति वाले वोटर
चुनाव प्रचार थमने के बाद अब राजनीतिक पार्टियों की निगाहें ऐसेे वोटरों पर हैं जिन्होंने अभी तय नहीं किया है कि किस पार्टी को वोट देना है। राजनीतिक पार्टियों के अनुसार, इस तरह के करीब 5 प्रतिशत मतदाता होते हैं, जो अनिर्णय की स्थिति में होते हैं।
बूथ प्रबंधन में जुटे कार्यकर्ता ऐसे वोटरों को बृहस्पतिवार देर रात से शुक्रवार देर रात तक साधेंगे। इस तरह के स्विंग करने वाले वोटर स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों से प्रभावित होते हैं। लिहाजा, उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए प्रभावशाली लोगों से संपर्क साधा जाएगा। राजनीतिक सर्वे में यह भी देखने को मिलता है कि अंतिम दौर में पैसा और शराब का खेल भी खूब चलता है। क्योंकि, इन वोटरों की भी भूमिका अहम होती है।