उत्कृष्ट महोत्सव का आगाज: जे पी नड्डा ने कहा- जहां संस्कृत वहीं संस्कृति, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है ये भाषा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि संस्कृत भाषा अंधकार से प्रकाश तक ले जाने का एक माध्यम है। भारत का ज्ञान-विज्ञान इसी संस्कृत भाषा में है। कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि यह उत्कर्ष महोत्सव न केवल संस्कृत विश्वविद्यालयों का है, बल्कि समस्त भारतवर्ष का है। नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने कहा कि सुपर कंप्यूटर को सक्षम बनाने में केवल संस्कृत ही समर्थ है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संस्कृत को जनता तक पहुंचाया जाए, क्योंकि यह ज्ञान और विज्ञान का विषय है। जहां संस्कृत है वहीं संस्कृति है। यह भाषा अंधकार से प्रकाश तक ले जाने का एक माध्यम है। संस्कृत को ठीक तरह से बढ़ाने की जरूरत है। ये बातें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहीं। वह शनिवार को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में बोल रहे थे। विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय उत्कर्ष महोत्सव की शुरुआत हुई, जो आगामी नौ मई तक चलेगा।
नड्डा ने कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल की संस्कृत आपस में मिल-जुलकर रहने की बात सिखाती है। इसका साक्षात प्रमाण कोरोना काल में भी देखा गया है। देश की सारी जनता ने सरकार के साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का सामना डटकर किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत की पढ़ाई इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत का ज्ञान-विज्ञान इसी संस्कृत भाषा में है। उन्होंने संस्कृत के संदंर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के महत्व को भी स्पष्ट किया।
शिक्षा में भारतीयता लाने के लिए संस्कृत की आवश्यकता
संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि यह उत्कर्ष महोत्सव न केवल संस्कृत विश्वविद्यालयों का है, बल्कि समस्त भारतवर्ष का है। शिक्षा में भारतीयता लाने के लिए संस्कृत के अध्ययन और अध्यापन की आवश्यकता है। तिरूपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. राधाकांत ठाकुर ने कहा कि संस्कृत का अधिक महत्व है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी भारतीय ज्ञान पंरपरा के महत्व पर बल देती है।
सुपर कंप्यूटर को सक्षम बनाने में केवल संस्कृत ही समर्थ- कुलाधिपति विजय भटकर
उद्घाटन समारोह में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति विजय भटकर ने कहा कि सुपर कंप्यूटर को सक्षम बनाने में केवल संस्कृत ही समर्थ है। उन्होंने कहा कि भावना और मशीन के बीच निकली भाषा में भावना बचाने की सबसे प्रभावी भूमिका संस्कृता भाषा ही कर सकती है।