कैलाश गहलौत के जाने से 'आप' को फायदा!: विधानसभा चुनाव में केजरीवाल खुलकर खेलेंगे ये खेल, दूर तक जाएगा संदेश
राजनीति के जानकारों की माने तो आम आदमी पार्टी के गठन के बाद से अब तक कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। पार्टी के थिंक टैंक माने वाले योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, किरण बेदी और कुमार विश्वास समेत कई नेता किनारा कर चुके हैं। बावजूद अरविंद केजरीवाल में लोगों का विश्वास कायम है।
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पिछले कई अरसे से दिल्ली की सत्ता से दूर रही भाजपा सत्ता पक्ष के खिलाफ इस बार कोई कसर नहीं छोड़ने के मूड में नहीं दिखाई पड़ रही। आम आदमी पार्टी के कथित भ्रष्टाचार पर हमलावर रही भाजपा बागी नेताओं को भी अपनाने में पीछे नहीं है। दरअसल इसके पीछे की रणनीति आम आदमी पार्टी के मनोबल को तोड़ने की है।
आप की पोल खुलवाने की रणनीति
रणनीति के तहत भाजपा आम आदमी पार्टी के बागियों को अपने पाले में कर रही है। ताकि चुनाव प्रचार के दौरान उनके ही नेताओं से सरकार के भ्रष्टाचार का पोल खुलवाया जा सके। हालांकि अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी को वन मैन शो वाली पार्टी बना चुके हैं, लिहाजा किसी के आने व जाने से पार्टी में बहुत ज्यादा डेंट की उम्मीद नहीं।
दिल्ली की सियासत में आया भू-चाल
पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत का आम आदमी पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने को चुनावी जानकार कई सियासी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। जोड़-तोड़ की राजनीति किसी भी पार्टी के लिए नई नहीं है, लेकिन गहलोत प्रकरण ने दिल्ली की सियासत में भू-चाल ला दिया है।
अब खुलकर विक्टिम कार्ड खेलेंगे केजरीवाल
राजनीति के जानकारों की माने तो आम आदमी पार्टी के गठन के बाद से अब तक कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। पार्टी के थिंक टैंक माने वाले योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, किरण बेदी और कुमार विश्वास समेत कई नेता किनारा कर चुके हैं। बावजूद अरविंद केजरीवाल में लोगों का विश्वास कायम है। बागियों की वजह से उन्हें अब खुलकर विक्टिम कार्ड भी खेलने का मौका मिलेगा। केजरीवाल यह साबित करेंगे कि भाजपा ईडी और सीबीआई का डर दिखाकर आप को खत्म करना चाहती है। वे कई साल से यह आरोप भाजपा पर लगा भी रहे हैं। भाजपा और केंद्र सरकार मिलकर आम आदमी पार्टी को खत्म करना चाहते हैं। उनको अपनी बात को सही ठहराने का वजह मिल गया है।
जागी कांग्रेस की उम्मीद
उधर, भाजपा और कांग्रेस की उम्मीदें सत्ता के करीब पहुंचने की बढ़ गई है। अब उन्हें लगने लगा है कि अरविंद केजरीवाल के सभी विश्वासपात्र उनसे दूरी बना रहे हैं। इस फेहरिस्त में अभी कई लोग शामिल है। वक्त के साथ वह भी पाला बदलेंगे और कार्यकर्ताओं में इसका संदेश नकारात्मक जाएगा। चुनाव नजदीक है लिहाजा पार्टी के भीतर टूट-फुट से आम आदमी पार्टी के खिलाफ संदेश दूर तक जाएगा। कांग्रेस पार्टी को भी उम्मीद है कि उनके मतदाता जो आम आदमी पार्टी के करीब चले गए है उनका मोह भंग होगा और वे वापस कांग्रेस के पाले में आएंगे।