भाजपा ने शुरू किया उम्मीदवारों का चयन
सरकार बनाने के कयासों के बीच प्रदेश भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी है। साथ ही लोकसभा चुनाव में मिले मत के आधार पर प्रत्याशियों का आकलन भी शुरू हो गया है।
भाजपा की बेचैनी उन विधानसभा सीटों को लेकर ज्यादा है जहां लोकसभा चुनाव में जीत-हार का अंतर 15 प्रतिशत रहा।
इसी तरह दस विधानसभा जहां लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की है वह क्षेत्र भी भाजपा केलिए परेशानी बढ़ा रहे हैं। लिहाजा ऐसी सीटों पर भाजपा ने पिछले चुनाव में लड़े नेताओं पर अपनी नजर टेढ़ी कर ली है।
इस तरह चुने जाएंगे प्रत्याशी
भाजपा ने भले ही लोकसभा चुनाव में कुल 70 विधानसभा क्षेत्र में 60 विधानसभा में जीत दर्ज की है, लेकिन 26 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां हार-जीत का अंतर 15 प्रतिशत या इससे भी कम का है। इसके साथ ही 10 विधानसभा क्षेत्र में भाजपा हारी भी है।
दोनों को अगर जोड़ दें तो आकड़ा 36 का बैठता है। ऐसे में 34 सीट ही भाजपा मान कर चल रही है कि उसकी जीती हुई हैं।
लिहाजा पार्टी विधानसभा चुनाव की संभावना को देखते हुए प्रत्याशियों को लेकर समीक्षा करनी शुरू कर दी है। 39 विधानसभा ऐसे हैं जहां जहां 20 प्रतिशत या इससे कम मार्जिन से जीत हुई है।
क्या कहते हैं पार्टी सूत्र
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भारी मतों से हारने वाले प्रत्याशियों पर तो गाज गिरा ही सकती है साथ ही लोकसभा चुनाव में पंद्रह प्रतिशत से कम वोटों के अंतर से लोकसभा के प्रत्याशी को जीत दिलवाने वाले विधायक व हारे हुए प्रत्याशी पर गाज गिरा सकती है।
पार्टी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के कारण आम आदमी पार्टी का प्रभाव कम रहा। लेकिन विधानसभा चुनाव में यह स्थिति नहीं रहने वाली है। लिहाजा प्रत्याशी मजबूत और जूझारू होने चाहिए।
लोकसभा चुनाव में भाजपा की हारी हुईं सीटें
भाजपा जिस विधानसभा में 10 व इससे भी कम प्रतिशत मार्जिन से जीतीं, वो ये हैं- बल्लीमारान (0.7 प्रतिशत), मंगोलपुरी (1.3 प्रतिशत), मुस्तफाबाद (3 प्रतिशत), त्रिलोकपुरी (3.4 प्रतिशत), तुगलकाबाद (5.3 प्रतिशत)।
इसके अलावा ( जंगपुरा (6.7 प्रतिशत), पटेल नगर (9.7 प्रतिशत), बुराड़ी (7 प्रतिशत), चांदनी चौक (6.9 प्रतिशत), राजौरी गार्डेन (8 प्रतिशत), बाबरपुर (7.7 प्रतिशत), बवाना (8.8 प्रतिशत), कालकाजी (9.4 प्रतिशत), तिलकनगर (9.7 प्रतिशत), तिमारपुर (10 प्रतिशत)।