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अनंत की यात्रा पर केदारनाथ सिंहः दिल्ली में बसा रखा था गंगा-सरयू का गांव

Tue, 20 Mar 2018 04:05 PM IST
अरुण आदित्य/अमर उजाला, नई दिल्ली
अरुण आदित्य/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 20 Mar 2018 04:05 PM IST
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biggest poet of hindi kedarnath singh passes away and left his ganga saryu village in delhi
kedarnath singh

केदारनाथ सिंह दिल्ली में करीब चार दशक से ज्यादा समय से रहते हुए भी ग्रामीण संवेदना के कवि बने रहे। छल-बल की इस राजधानी में भी उन्होंने अपने आस-पास गंगा-सरयू  के दोआबे का एक गांव बसा लिया था।

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kedarnath singh

यह गांव उनकी चेतना में बसता था। इस गांव से संबंध बनाए रखने के लिए वे बार-बार स्मृतियों में जाते रहे। सहज ग्रामीण संवेदना उन्हें एक विशिष्ट काव्य-दृष्टि देती थी। इस काव्य-दृष्टि का ही कमाल था कि बरामदे में रखी हुई कुदाल पर एक शानदार कविता लिख सकते थे।

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kedarnath singh

उनकी कविता में आते ही कुदाल सिर्फ एक भौतिक वस्तु नहीं रह जाती, बल्कि एक चुनौती बन जाती है। कवि की दृष्टि कुदाल की भौतिक उपस्थिति को श्रमजीवी वर्ग की उपेक्षा और विक्षोभ का प्रतीक बना देती।

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kedarnath singh

कुदाल, जिसका कद सदी के इस अंधकार में धीरे-धीरे बढ़ रहा है और जिसे दरवाजे पर छोड़ना खतरनाक है, सड़क पर रख देना असंभव और आभिजात्य घर में जिसके लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे में उस कुदाल का क्या किया जाए, यह एक बहुत बड़ा प्रश्न बन जाता है।

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केदारनाथ सिंह

केदार जी की कविता में यह धार लोकजीवन से उनके जुड़ाव की वजह में आई, जहां चीजों के साथ लोगों के संबंध बड़े रागात्मक होते हैं। मानसून की प्रथम बौछार के बाद जब पहली बार खेत में हल भेजा जाता है तो उसकी पूजा की जाती है। यही वे संस्कार हैं जो चकिया(बलिया) के गोबर से लीपे आंगन से दिल्ली के आधुनिक या उत्तर आधुनिक जीवन तक केदार जी का पीछा करते रहे।

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