महामारी के बीच मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से जारी है जंग, जरूरी है सतर्कता और संयम
- कोरोना संक्रमण के बीच आए अम्फान तूफान के अलावा भूकंप से भी कई बार धरती डोल चुकी है
- 2020 को प्राकृतिक आपदाओं के वर्ष के रूप में भी देखा जा रहा है
- वैज्ञानिक मौसमी घटनाओं को सामान्य बताते हैं
विस्तार
साल 2019 और 20 का संधिकाल जिस कोरोना महामारी को लेकर आया उससे पूरी दुनिया अब भी जूझ रही है। कोरोना संक्रमण के बीच आए अम्फान तूफान के अलावा भूकंप से भी कई बार धरती डोल चुकी है। हालांकि वैज्ञानिक जिन मौसमी घटनाओं को सामान्य बताते हैं अगर एक चक्र के रूप में वे लगातार सामने आती हैं तो उनकी विवेचना अलग तरह से होती है। 2020 को प्राकृतिक आपदाओं के वर्ष के रूप में भी देखा जा रहा है।
शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कुछ इलाकों में एक घंटे के अंदर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए। इसका केंद्र हरियाणा का रोहतक था। दो महीने में भूकंप के झटके पांचवीं बार लगे।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के मुताबिक पहला झटका रात 9:08 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.6 दर्ज हुई। वहीं, रात 10 बजे फिर यहीं पर भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 2.9 दर्ज की गई।
एनसीएस के मुताबिक, भूकंप जमीन से करीब पांच किलोमीटर नीचे आया। इसके झटके हरियाणा और पंजाब में भी महसूस किए गए। हालांकि इससे किसी नुकसान की खबर नहीं है।
पिछले करीब दो महीने में कई बार भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए हैं, जिनका केंद्र दिल्ली या एनसीआर रहा है। मई में दिल्ली-एनसीआर में भूकंप का यह तीसरा झटका है। दिल्ली-एनसीआर में इससे पहले 12 व 13 अप्रैल, 10 और 15 मई को भी भूकंप आया था। वहीं, 25 मई को मणिपुर में 13 मिनट के अंतर पर दो बार भूकंप आया था।
दिल्ली-एनसीआर में लगातार झटके
कब तीव्रता
12 अप्रैल 3.5
13 अप्रैल 2.7
10 मई 3.4
15 मई 2.2
29 मई 4.6 और 2.9
भूकंप के वक्त सावधानियां
- धरती कांपने के समय घर और दफ्तर से जल्द बाहर निकल जाएं और जब तक भूकंप के झटके खत्म न हों बाहर ही रहें
- भूकंप के समय ऊंची इमारतों और बिजली के खंभों आदि से दूर रहें
- अगर भीड़ वाली और सघन जगह पर हों तो वहां से खुले स्थान का तत्काल रुख करें
- चलती गाड़ी में होने पर जल्द गाड़ी रोक लें और गाड़ी में ही बैठे रहें
- बिस्तर पर हैं, तो लेटे रहें, तकिये से सिर ढक लें
- भूकंप के वक्त कांच, खिड़कियों, दरवाज़ों और दीवारों से दूर रहें
- भूकंप के समय पुलों या सड़कों पर जाने से बचें
- भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल न करें
- भूकंप महसूस होते ही टीवी, फ्रिज, जैसे बिजली के सारे उपकरण प्लग से निकाल दें
- भूकंप के समय अगर आप घर के अंदर हैं तो फर्श पर बैठ जाएं
- एक बार बहुत तेज भूकंप आने के बाद कुछ घंटों तक हल्के झटके आ सकते हैं। इनसे बचने का इंतजाम पहले ही कर लें
कोरोना के बीच अम्फान
कोरोना से जंग से बीच कुछ ही दिन पहले अम्फान तूफान ने कहर बरपाया। कोरोना के कारण दुनिया भर में अब तक 3,62,990 लोगों की जान जा चुकी है और भारत में 4704 लोग महामारी से जंग हार चुके हैं। इस बीच अम्फान तूफान ने पश्चिम बंगाल में 80 से अधिक लोगों की जान ले ली। 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए इस तूफान ने कोलकाता एयरपोर्ट तक को क्षतिग्रस्त कर दिया। तूफान से तबाही कितनी हुई इसका आकलन अभी होना बाकी है।
मौसम और महामारी
कोरोना महामारी से साथ मौसमी की असामान्य हलचल का कारण पश्चिमी विक्षोभ माना जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र कहते हैं कि अम्फान तूफान या भूकंप भी सामान्य भौगोलिक घटनाएं हैं, जिन्हें सामान्य प्राकृतिक घटनाओं की तरह से ही देखा जाना चाहिए। महापात्रा का मानना है कि आने वाले समय में भी मौसम पूरी तरह सामान्य बना रहने की संभावना है। गर्मी की सामान्य अवधि के बाद पांच जून से देश में बारिश की शुरुआत होगी, जो 30 सिंतबर तक चलती रहेगी। देश की कृषि के लिहाज से वर्षा बिल्कुल सामान्य रहने का अनुमान है।
सावधानी और संयम जरूरी
कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में सोशल डिस्टेंसिंग जैसी व्यावहारिक सावधानी को एक अत्यधिक कारगर अस्त्र के रूप में देखा और बताया जा रहा है। खान-पान में भी पौष्टिक चीजें आवश्यक हैं और साथ ही आहार ऐसा होना चाहिए जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए। लेकिन इसके साथ ही कई मामलों में संयम की भी दरकार है। बदलते मौसम में भी संयम बरतने की जरूरत है।