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‘पहले राक्षस होते थे, अब होते हैं आतंकवादी’
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 08 Feb 2015 09:00 PM IST
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‘पहले के जमाने में राक्षस होते थे, अब आतंकवादी राक्षस की भूमिका अदा कर रहे हैं। इन्हें खत्म करने के लिए महापुरुषों ने योजनाएं बर्नाइं थीं और धरती से राक्षस जाति का नाश कर दिया था। वर्तमान में राष्ट्र का नेतृत्व करने वालों को आतंकवादियों के सफाए के लिए योजना बनानी होगी।’
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यह कहना है राष्ट्रीय आरएसएस के सर संघ चालक डा. मोहन भागवत का। सर संघ चालक रविवार को गाजियाबाद के कमला नेहरू नगर स्थित मैदान में संघ समागम कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे।
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अपने 45 मिनट के संबोधन में डा. मोहन भागवत ने कहा कि संघ के बारे में कुछ लोग नहीं जानते हैं। ऐसे लोग खुद भ्रमित होने के साथ ही दूसरों के सामने भी संघ की गलत छवि प्रस्तुत करते हैं। संघ को जानना है तो इसमें लगने वाली शाखाओं में आना होगा।
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स्वतंत्रता सेनानियों को शस्त्र-भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही आजाद राष्ट्र में भारत माता के सम्मान को संघ ने ऊर्जा दी है। संघ को केवल संघमय होकर ही समझा जा सकता है। हमारी कमियों की चर्चा करने वालों को जवाब देने का यही अनुकूल मौका है। हिंदू और हिंदुस्तान अनेक आक्रमणों के बाद स्थिर रहा है और आज भी है।
इजराइल का उदाहरण देते हुए उन्होंने देश को स्वाभिमान के साथ खड़े होने पर जोर दिया। इसमें प्रत्येक नागरिक के सहयोग की जरूरत है। ऐसा होने पर दुनिया का कोई देश भारत केसामने नजर नहीं उठा सकेगा।
आजादी के समय देश समृद्ध था। गलत नीतियों के कारण देश गरीब हो गया। जब तक लोगों में स्वाभिमान जाग्रत नहीं होगा, तब तक देश विकास नहीं कर सकेगा। देश का विकास हिंदुओं के सम्मान और नेतृत्व में ही संभव है। इससे पूर्व व्यायाम कार्यक्रम हुआ। ध्वज प्रणाम के उपरांत भारत माता के सम्मान में गीत प्रस्तुत किया गया।
सर संघ चालक ने यह भी कहा
स्वयंसेवक अपने चरित्र व व्यवहार से करें दूसरों को प्रभावित
सशक्त हिंदू राष्ट्र ही करेगा दुनिया का नेतृत्व
देश को अपना मानने वालों का होगा सम्मान, देश के दुश्मनों को मिलेगा जवाब
हिंदू विचारधारा को मानने पर ही समृद्ध और शक्तिशाली होगा सकेगा देश
विरोधियों को जवाब न दें, अपना काम कुशलता से करें
डा. हेडगेवार, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, गांधी और वीर सावरकर का किया स्मरण
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समय पालन में रहा अनुशासन
आरएसएस के कार्यक्रम में समय का पालन किया गया। निश्चित समय पर संघ का व्यायाम प्रदर्शन शुरू हुआ और निश्चित समय पर 11:30 बजे संघ प्रमुख मंच पर पहुंचे। ठीक 11: 45 पर उद्बोधन शुरू किया और 12: 30 पर संबोधन पूर्ण किया और 12: 45 पर डा. मोहन भागवत मेरठ के लिए रवाना हो गए।
स्वयंसेवकों ने संभाली यातायात व्यवस्था की कमान
वाहनों को नियंत्रित करने और बसों, दोपहिया, चौपहिया वाहनों को निर्धारित पार्किंग में खड़ा कराने का दायित्व स्वयंसेवकों ने संभाल रखा था। पैदल में भी वह सड़क पर एक ओर लाइन लगाकर चल रहे थे। इस दौरान कहीं पर जाम नहीं लगने दिया। इसकी चर्चा पुलिस अधिकारी भी करते नजर आए।
खुद साफ किया कूड़ा-कचरा
स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम स्थल का कूड़ा कचरा एकत्रित किया। चाय के जूठे प्याले हों या पानी की खाली थैलियां, भोजन के बाद अखबारों के टुकड़ों तक को एकत्रित कर बोरों में भरकर रखा गया था। करीब 15 हजार स्वयंसेवक एकत्रित होने के बावजूद जरा भी अव्यवस्था नहीं हुई।
सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी
संघ प्रमुख की सुरक्षा बेहद कड़ी रखी गई। स्वयंसेवकों के अलावा भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। डॉग स्क्वायड से उनके आने से पहले मंच व आने-जाने के प्रत्येक स्थान की जांच कराई गई। मंच के पीछे खड़े वाहनों को हटवा दिया गया।
आसपास के ऊंचे स्थानों पर भी पुलिसकर्मी तैनात रहे। संघ प्रमुख की सुरक्षा में दंडधारी (लाठियां लेकर) स्वयंसेवक लगाए गए थे। यह तैनाती हमेशा रहती है। इसके अलावा कई स्वयंसेवक रिवाल्वर लगाए हुए थे। उनको मंच के आसपास लगाया गया था।
बिना गणवेश नहीं मिला प्रवेश
कमला नेहरूनगर मैदान के दोनों प्रवेशद्वारों पर स्वयंसेवक चेकिंग कर रहे थे। द्वार से बिना गणवेश के किसी को प्रवेश नहीं करने दिया गया। केवल पुलिस और मीडिया के लोगों को ही अंदर जाने की इजाजत थी। द्वार पर गणवेश की बिक्री भी हो रही थी।