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साइबर क्राइम के ‘वायरस’ से उड़ी पुलिस की नींद
सौरभ श्रीवास्तव/अमर उजाला, नोएडा
Updated Wed, 10 Feb 2016 06:36 PM IST
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सूबे में साइबर क्राइम का ग्राफ बढ़ने से पुलिस की नींद उड़ रही है। साइबर अपराधी पुलिस की योजनाओं को फेल कर रहे हैं। वर्ष 2010 से 15 तक लखनऊ जोन में साइबर क्राइम के सबसे अधिक 948 मामले दर्ज हुए, जबकि मेरठ में 759 और कानपुर जोन में 636 मामले दर्ज किए गए।
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यह खुलासा शासन को भेजी रिपोर्ट में हुआ है। 4119 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। एडीजी लॉ एंड आर्डर दलजीत सिंह चौधरी का कहना है कि साइबर क्राइम रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
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आर्थिक क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्र्ड द्वारा इलेक्ट्रानिक मनी ट्रांजेक्शन में वृद्धि हुई। प्रदेश में हेराफेरी, इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड, सूचना तकनीक से अश्लीलता फैलाने, ईमेल का दुरुपयोग कर ब्लैकमेल करने, फर्जी ईमेल और एसएमएस से प्रताड़ित करने के मामलों में भी साल दर साल बढ़ोत्तरी हो रही है।
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पांच वर्षों की तुलनात्मक आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में वर्ष 2010 में 47, 2011 में 110, वर्ष 2012 में 314, वर्ष 2013 में 727, वर्ष 2014 में 1756 और वर्ष 2015 में 1983 मामले साइबर से संबंधित दर्ज किए गए।
साइबर कोर्ट के गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा
यह सच है कि साइबर क्राइम का ग्राफ बढ़ा है। साइबर संबंधित अपराधों को दर्ज कर उनके निस्तारण के लिए जो दो साइबर थाने गौतमबुद्ध नगर और लखनऊ में बनने वाले हैं उनमें से लखनऊ का साइबर थाना एसटीएफ की देखरेख में होगा और गौतमबुद्धनगर में साइबर थाना नोएडा पुलिस की ही सुपरविजन में रहेगा।
-दलजीत सिंह चौधरी, एडीजी लॉ एंड आर्डर
साइबर कोर्ट के गठन का प्रस्ताव भेजा
साइबर क्राइम के निस्तारण के लिए प्रदेश में साइबर कोर्ट के गठन का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश पुलिस ने शासन को भेजा है। हाल ही में नोएडा और लखनऊ में साइबर थाने बनाए जाने का भी प्रस्ताव शासन को भेजा गया था।
प्रस्ताव में भेजा गया है कि साइबर थाने में वही मुकदमे दर्ज होंगे जो सांप्रदायिक एवं कानून व्यवस्था के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण हो। धोखाधड़ी की धनराशि न्यूनतम 10 लाख रुपये होने पर ही साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
साइबर अपराध से संबंधित मुकदमों के निस्तारण के लिए एक विशेष कोर्ट के गठन का प्रस्ताव भेजा गया है जिससे सभी मामलों का जल्द से जल्द निस्तारण कर लिया जाए।