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‘पत्नी से मारपीट, वेतन छीनना और चरित्र पर अंगुली उठाना क्रूरता’

Mon, 12 Dec 2016 11:33 AM IST
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 12 Dec 2016 11:33 AM IST
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beating wife, taking her salary and blaming her as characterless is cruel says high court

पत्नी से मारपीट, दहेज की मांग, उसके चरित्र पर अंगुली उठाना, वेतन छीनना, ससुर से पैसे लेना व वापस न करना उनके प्रति क्रूरता है। हाईकोर्ट ने उक्त तर्क देते हुए कहा कि क्रूरता का कोई मापदंड तय नहीं किया जा सकता। क्रूरता की परिभाषा हर मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर तय की जाती है।

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न्यायमूर्ति प्रदीपनंदजोग व न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की खंडपीठ यह निर्णय एक मामले में पति की याचिका को खारिज करते दी। पति ने क्रूरता के आधार पर पत्नी को प्रदान तलाक संबंधी पारिवारिक अदालत द्वारा दिए फैसले को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा इस मामले में पति ने पत्नी से हर प्रकार का दुर्व्यवहार किया।
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इस शिकायत के बाद पति ने पुलिस के समक्ष लिखित रूप से माना था कि उसने उक्त सभी कार्य किए हैं। उसने लिखकर माफी मांगते हुए माना था कि वह भविष्य में मारपीट नहीं करेगा, उसका वेतन नहीं छीनेगा, उसके चरित्र पर अंगुली नहीं उठाएगा और न ही दहेज मांगेगा। अदालत ने पति के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसने माफी मात्र पत्नी की इगो को संतुष्ट करने और विवाह को बचाने के लिए मांगी थी।

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अदालत ने कहा कि पति ऐसा एक भी साक्ष्य पेश नहीं कर पाया, जिससे साबित हो कि उसने पत्नी को प्रताड़ित नहीं किया। उसने पत्नी से समझौता किया, लेकिन उसका पालन नहीं किया। वह बिना पैसे दिए स्वतंत्रता का आनंद ले रहा है।

अदालत ने कहा कि वैवाहिक जीवन का अर्थ मात्र संभोग से नहीं है। कलह दोनों में मानसिक क्रूरता पैदा कर देता है और वे साथ नहीं रह पाते। इस मामले में दोनों वर्ष 2009 से अलग रह रहे हैं और उनका साथ रहना संभव नहीं है।

पति के रवैये को देखते हुए स्पष्ट है कि यह रवैया पत्नी के प्रति क्रूरता है और वे महसूस करते हैं कि पत्नी के तलाक संबंधी आवेदन को स्वीकार करने वाले फैसले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।

पेश मामले में दोनों पति-पत्नी का विवाह मार्च 2004 को हुआ था। पति हिमाचल में सेंट्रल स्कूल में टीचर था और दोनों वहीं चले गए। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति मारपीट, देहज की मांग इत्यादि करता था तो वह मार्च में ही वापस आ गई।

इसके बाद पति भी अगस्त में त्यागपत्र देकर दिल्ली आ गया। दोनों में सहमति बनी व दोनों दिल्ली में नौकरी करने लगे, लेकिन पति का व्यवहार नहीं बदला आखिर दोनों अगस्त, 2009 से अलग रह रहे हैं। 

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