सावधान! गैस की तकलीफ आपकी जान भी ले सकती है, पढ़ें पूरी खबर
सुनकर थोड़ा अजीब लगेगा कि पेट में गैस की तकलीफ होने पर हार्ट अटैक की संभावना हो सकती है। लेकिन एम्स के ह्दय रोग विशेषज्ञों ने इसकी पुष्टि की है। इनका कहना है कि हार्ट अटैक वाले मरीजों से पूछताछ और उनकी केस स्टडी देखने के बाद यह पता चला है कि 50 फीसदी मरीजों को ही अटैक से पहले एनजाइना दर्द होता है।
जबकि अन्य मरीजों को पेट में गैस के साथ-साथ दांत और जबड़े से लेकर नाभी तक के हिस्से में दर्द देखने को मिला। डॉक्टरों का कहना है कि हार्ट अटैक के हाई रिस्क वाले लोगों को शरीर के इस हिस्से में होने वाले किसी भी दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉ. राकेश यादव ने बताया कि 38 से ऊपर वाले मरीज जिन्हें रक्तचाप के साथ मधुमेह और हाइपरटेंशन की परेशानी है। ऐसे लोगों को हार्ट अटैक को लेकर हाई रिस्क पर रखा जाता है। जिन लोगों के परिवार में हार्ट अटैक के केस सामने आए हों, उन्हें भी रिस्क रहता है।
अक्सर लोग हार्ट अटैक के दर्द को पहचानने में भूल कर देते हैं
इनके अलावा सिगरेट और शराब का सेवन करने वाले भी इस समूह में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले एक 65 वर्षीय मरीज एम्स आया था। उन्हें प्रारंभ में गैस की समस्या थी। हालांकि, इनो लेने पर वह ठीक हो जाती है।
मगर पिछले कुछ दिनों से इनो भी काम नहीं कर रहा था। मरीज का जब इको किया जा रहा था तभी वे कार्डिएक अरेस्ट में चले गए। गनीमत थी कि उन्हें अरेस्ट एम्स में आया था, जिससे उन्हें बचा लिया गया। डॉ. राकेश बताते हैं कि उन मरीज की तरह ही अक्सर लोग हार्ट अटैक के दर्द को पहचानने में भूल कर देते हैं। जिससे उन्हें सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता है।
सुबह से रात तक रखें खाने का ध्यान
डॉक्टरों की मानें तो हार्ट अटैक की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। लोगों को सुबह से रात तक भोजन का ख्याल रखना होगा। सिगरेट और शराब का सेवन छोड़ना होगा। साथ ही व्यायाम जरूरी है। छह माह के भीतर कोलेस्ट्रॉल के अलावा रक्तचाप और मधुमेह पर निगरानी रखनी होगी। इसी तरह बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
क्या कहते हैं आंकड़े
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में प्रति लाख 132 लोगों की हर वर्ष दिल की बीमारियों की वजह से मौत हो रही है। नीति आयोग की इस संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रति वर्ष होने वाली मौतों में 28 फीसदी दिल की बीमारियों के चलते हो रही हैं। पंजाब और तमिलनाडु में स्थिति ज्यादा गंभीर है। पंजाब में प्रति लाख 261 मरीजों में यह बीमारी देखने को मिल रही है। जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा 208 है।