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Delhi NCR News: डीयू में बीकॉम, अंग्रेजी, कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई होगी ऑनलाइन
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-डीयू के एसओएल में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से पाठ्यक्रमों को किया जाएगा शुरू
-प्रस्ताव डीयू में अगले सप्ताह होने वाली कार्यकारी परिषद में रखा जाएगा, अकादमिक परिषद से मिल चुकी है मंजूरी
-ई-स्टडी लर्निंग मटेरियल व ऑनलाइन पोर्टल भी किया जाएगा तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से छात्र बीकॉम ऑनर्स, बीए ऑनर्स अंग्रेजी, बीएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई ऑनलाइन मोड में कर सकेंगे। डीयू का स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। एसओएल ने स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा कार्यक्रमों को ऑनलाइन मोड में शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है।
इस संबंध में प्रस्ताव को अगले सप्ताह होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। जहां इस पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। प्रस्ताव को डीयू की अकादमिक काउंसिल से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्तावित ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में बीकॉम ऑनर्स, बीए ऑनर्स अंग्रेजी, एमबीए और बीएससी ऑनर्स कंप्यूटर साइंस जैसे लोकप्रिय कोर्स शामिल हैं। इसके अलावा विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी ऑनलाइन मोड में उपलब्ध कराने की योजना को भी अकादमिक परिषद हरी झंडी दे चुका है।
विश्वविद्यालय के अनुसार ऑनलाइन कार्यक्रम शुरू करने से पहले महत्वपूर्ण तैयारियां पूरी की जा रही हैं। इनमें पाठ्यक्रमों के लिए ई-स्टडी लर्निंग मटेरियल तैयार करना प्रमुख है, जिससे छात्रों को डिजिटल माध्यम में गुणवत्तापूर्ण सामग्री मिल सके। इसके अलावा प्रवेश और परीक्षा के लिए समर्पित ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम बन सके।
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ऑनलाइन कार्यक्रम शुरू करने के लिए यूजीसी के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो से मंजूरी लेना भी अनिवार्य है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस दिशा में भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। एसओएल से जुड़े अधिकारी के अनुसार डीयू का कदम उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगा, जो नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते या कामकाजी हैं। ऑनलाइन मोड के जरिए पढ़ाई से देश-विदेश के छात्र भी एसओएल से जुड़ सकेंगे। यदि कार्यकारी परिषद से मंजूरी मिल जाती है तो ये ऑनलाइन पाठ्यक्रम अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू कर दिए जाएंगे।
सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को भी मंजूरी के लिए रखा जाएगा
डीयू की हाल ही में हुई अकादमिक परिषद से सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे 29 अप्रैल को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में पास कराने के लिए रखा जा रहा है सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (एसएपी) प्रोग्राम के तहत छात्र पाठ्यक्रम का एक हिस्सा (एक सेमेस्टर) भारत में और एक हिस्सा विदेशी संस्थानों में पूरा कर सकते हैं। इस तरह से उन्हें विदेश में पढ़ने, रिसर्च और इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा। हालांकि इसको लेकर अकादमिक परिषद में सदस्यों ने विरोध जताया था। ऐसे में कार्यकारी परिषद में भी प्रस्ताव को विरोध झेलना पड़ सकता है।
एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम को मिलेगी मंजूरी
दिल्ली विश्वविद्यालय में इस साल शुरू होने वाले एक वर्षीय पाठ्यक्रम को अगले सप्ताह 29 अप्रैल होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। हाल ही में हुई अकादमिक परिषद की बैठक में विभिन्न विभागों में एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी मिली है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया जाएगा।
एक वर्षीय पीजी चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के चौथे वर्ष के पूर्ण होने के साथ जुड़ा हुआ है। नए ढांचे के अनुसार, जो छात्र चार वर्षीय यूजी पूरा करेंगे, वे अब केवल एक वर्ष में अपना पीजी कोर्स पूरा कर सकेंगे। इससे छात्रों का समय बचेगा और वे जल्दी रोजगार या शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे।
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-प्रस्ताव डीयू में अगले सप्ताह होने वाली कार्यकारी परिषद में रखा जाएगा, अकादमिक परिषद से मिल चुकी है मंजूरी
-ई-स्टडी लर्निंग मटेरियल व ऑनलाइन पोर्टल भी किया जाएगा तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से छात्र बीकॉम ऑनर्स, बीए ऑनर्स अंग्रेजी, बीएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई ऑनलाइन मोड में कर सकेंगे। डीयू का स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। एसओएल ने स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा कार्यक्रमों को ऑनलाइन मोड में शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है।
इस संबंध में प्रस्ताव को अगले सप्ताह होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। जहां इस पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। प्रस्ताव को डीयू की अकादमिक काउंसिल से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्तावित ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में बीकॉम ऑनर्स, बीए ऑनर्स अंग्रेजी, एमबीए और बीएससी ऑनर्स कंप्यूटर साइंस जैसे लोकप्रिय कोर्स शामिल हैं। इसके अलावा विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी ऑनलाइन मोड में उपलब्ध कराने की योजना को भी अकादमिक परिषद हरी झंडी दे चुका है।
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विश्वविद्यालय के अनुसार ऑनलाइन कार्यक्रम शुरू करने से पहले महत्वपूर्ण तैयारियां पूरी की जा रही हैं। इनमें पाठ्यक्रमों के लिए ई-स्टडी लर्निंग मटेरियल तैयार करना प्रमुख है, जिससे छात्रों को डिजिटल माध्यम में गुणवत्तापूर्ण सामग्री मिल सके। इसके अलावा प्रवेश और परीक्षा के लिए समर्पित ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम बन सके।
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ऑनलाइन कार्यक्रम शुरू करने के लिए यूजीसी के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो से मंजूरी लेना भी अनिवार्य है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस दिशा में भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। एसओएल से जुड़े अधिकारी के अनुसार डीयू का कदम उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगा, जो नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते या कामकाजी हैं। ऑनलाइन मोड के जरिए पढ़ाई से देश-विदेश के छात्र भी एसओएल से जुड़ सकेंगे। यदि कार्यकारी परिषद से मंजूरी मिल जाती है तो ये ऑनलाइन पाठ्यक्रम अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू कर दिए जाएंगे।
सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को भी मंजूरी के लिए रखा जाएगा
डीयू की हाल ही में हुई अकादमिक परिषद से सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे 29 अप्रैल को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में पास कराने के लिए रखा जा रहा है सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (एसएपी) प्रोग्राम के तहत छात्र पाठ्यक्रम का एक हिस्सा (एक सेमेस्टर) भारत में और एक हिस्सा विदेशी संस्थानों में पूरा कर सकते हैं। इस तरह से उन्हें विदेश में पढ़ने, रिसर्च और इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा। हालांकि इसको लेकर अकादमिक परिषद में सदस्यों ने विरोध जताया था। ऐसे में कार्यकारी परिषद में भी प्रस्ताव को विरोध झेलना पड़ सकता है।
एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम को मिलेगी मंजूरी
दिल्ली विश्वविद्यालय में इस साल शुरू होने वाले एक वर्षीय पाठ्यक्रम को अगले सप्ताह 29 अप्रैल होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। हाल ही में हुई अकादमिक परिषद की बैठक में विभिन्न विभागों में एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी मिली है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया जाएगा।
एक वर्षीय पीजी चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के चौथे वर्ष के पूर्ण होने के साथ जुड़ा हुआ है। नए ढांचे के अनुसार, जो छात्र चार वर्षीय यूजी पूरा करेंगे, वे अब केवल एक वर्ष में अपना पीजी कोर्स पूरा कर सकेंगे। इससे छात्रों का समय बचेगा और वे जल्दी रोजगार या शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे।