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गोदाम में अवैध रूप से हो रही थी पटाखों की ऑनलाइन बिक्री, गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज

Sun, 21 Jan 2018 09:27 AM IST
शुजात आलम, ऩई दिल्ली
शुजात आलम, ऩई दिल्ली Updated Sun, 21 Jan 2018 09:27 AM IST
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Bawana Industrial Area fire- Online sale of crackers was being illegal

बवाना की जिस गोदाम में भीषण आग लगी, वहां पर भारी मात्रा में पटाखों को स्टोर किया गया था। शुरुआती जांच में पता चला है कि गोदाम में अवैध रूप से पटाखों को ऑनलाइन बेचा जा रहा था।

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जो मजदूर हादसे का शिकार हुए वह ज्यादातर पैकिंग का काम करते थे। देर रात को दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह से काबू पाकर बिल्डिंग को सील कर दिया और बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया। सीएफएसएल और क्राइम टीम मौके पर जांच में जुटी थी।
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दमकल विभाग के निदेशक जीसी मिश्रा ने बताया कि बिल्डिंग के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर पटाखों को स्टोर किया गया था। चूंकि पटाखों में बारूद था, इसलिए किसी को बचने का मौका नहीं मिला और उनकी मौत हो गई। इधर मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि हादसे वाले गोदाम में गुपचुप तरीके से गतिविधियां चलती थी।
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कभी किसी मजदूर ने यह नहीं बताया था कि अंदर क्या हो रहा है। मिश्रा ने बताया कि दिल्ली में इतनी बड़ी मात्रा में पटाखों को रखना पर पूरी तरह प्रतिबंध है। गोदाम के मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली सरकार के अधिकारी, दमकल विभाग और पुलिस अपनी-अपनी जांच करेंगे।


रजनीश गुप्ता, पुलिस उपायुक्त, रोहिणी जिला ने बताया कि, आईपीसी की धारा 285 और 304 (लापरवाही बरतने और गैर इरादतन हत्या का मामला ) के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है। गोदाम के मालिकों की पहचान कर ली गई है, जल्द ही उनसे लापरवाही के कारणों के बारे में पूछताछ की जाएगी।

दमकल विभाग ने अवैध पटाखों के स्टॉक की क्यों नहीं की जांच?

Bawana Industrial Area fire- Online sale of crackers was being illegal

बवाना इलाके में हुए अग्नि हादसे में 17 लोगों की मौत का आखिर कौन जिम्मेदार है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गोदाम मालिकों ने अवैध रूप से पटाखों को स्टोर किया हुआ था। यदि ऐसा था तो दमकल विभाग के अधिकारियों ने अवैध पटाखों की जांच क्यों नहीं की?

दमकल विभाग ने गोदाम को किस चीज को रखने की अनुमति दी हुई थी। अनुमति थी या नहीं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने इस पर क्यों ध्यान नहीं दिया। स्थानीय लोगों का कहना कि इतने बड़े हादसे के लिए अकेले गोदाम का मालिक जिम्मेदार नहीं हो सकता है।

इसके लिए इससे संबंधित जांच एजेंसियां भी जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता है। जांच के नाम पर खानापूर्ति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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