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Delhi NCR News: बलराज साहनी की जीवन यात्रा मंच पर जीवंत
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- भावनाओं से सराबोर हुआ त्रिवेणी कला संगम, मेरी फिल्मी आत्मकथा नाट्य प्रस्तुति में संघर्ष, संवेदनाएं और सिनेमा का संगम
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता बलराज साहनी के जीवन की संवेदनशील और प्रेरक कहानी को ‘मेरी फिल्मी आत्मकथा’ नामक संगीतमय नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से त्रिवेणी कला संगम में सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन उनकी 113वीं जयंती की पूर्व संध्या पर हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। थ्री आर्ट्स क्लब और कात्यायनी थिएटर ग्रुप के संयुक्त बैनर तले आयोजित इस प्रस्तुति में कलाकार निधिकान्त पाण्डेय ने बलराज साहनी की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से निभाया। उनके अभिनय ने साहनी के संघर्ष, संवेदनाएं और उपलब्धियों को जीवंत कर दिया। गायन में देवानंद झा ने मधुर आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, जबकि बुरहान कुरैशी ने 22 विभिन्न किरदारों को साकार कर प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया। संगीत में की-बोर्ड पर जीतू और तबले पर अधीर ने बेहतरीन तालमेल पेश किया। ‘आओ झूमें गाएं’ से शुरुआत हुई और ‘ऐ मेरी जोहराजबीं’ जैसे गीतों ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। अंत में सभागार तालियों से गूंज उठा और दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का अभिनंदन किया। निर्माता अनुराधा दर और निर्देशक सोहेला कपूर ने बताया कि ऐसी प्रस्तुतियां हर महीने आयोजित की जाएंगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता बलराज साहनी के जीवन की संवेदनशील और प्रेरक कहानी को ‘मेरी फिल्मी आत्मकथा’ नामक संगीतमय नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से त्रिवेणी कला संगम में सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन उनकी 113वीं जयंती की पूर्व संध्या पर हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। थ्री आर्ट्स क्लब और कात्यायनी थिएटर ग्रुप के संयुक्त बैनर तले आयोजित इस प्रस्तुति में कलाकार निधिकान्त पाण्डेय ने बलराज साहनी की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से निभाया। उनके अभिनय ने साहनी के संघर्ष, संवेदनाएं और उपलब्धियों को जीवंत कर दिया। गायन में देवानंद झा ने मधुर आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, जबकि बुरहान कुरैशी ने 22 विभिन्न किरदारों को साकार कर प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया। संगीत में की-बोर्ड पर जीतू और तबले पर अधीर ने बेहतरीन तालमेल पेश किया। ‘आओ झूमें गाएं’ से शुरुआत हुई और ‘ऐ मेरी जोहराजबीं’ जैसे गीतों ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। अंत में सभागार तालियों से गूंज उठा और दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का अभिनंदन किया। निर्माता अनुराधा दर और निर्देशक सोहेला कपूर ने बताया कि ऐसी प्रस्तुतियां हर महीने आयोजित की जाएंगी।