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Delhi NCR News: पीएमओ अधिकारी बनकर पोस्टिंग कराने वाले दो आरोपियों की जमानत खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के प्रधान सचिव का सहायक बनकर अधिकारियों की पोस्टिंग कराने की साजिश करने वाले दो अधिकारियों की जमानत खारिज की। अधिकारियों ने महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री पर दबाव बनाकर एक अधिकारी की मनचाही पोस्टिंग कराने का प्रयास किया था। इस मामले में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) देबी सिंह राणा और एक केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा में तैनात अशोक कुमार शामिल हैं।
विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विद्या प्रकाश ने अपने आदेश में कहा कि मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और कई सह-आरोपी अब भी फरार है। ऐसे में दोनों आरोपियों को जमानत देने से जांच प्रभावित होने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के डिप्टी कलेक्टर मधुसूदन बारगे के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई रुकवाने और उन्हें अंधेरी में डिप्टी कलेक्टर या भिवंडी में एसडीओ के पद पर तैनात कराने के लिए एक साजिश रची गई थी। जांच एजेंसी का दावा कि बारगे ने इसके लिए पहले मयूर सनस से संपर्क किया। सनस ने बिचौलिए भंवर सिंह के माध्यम से अशोक कुमार से संपर्क साधा। इसके बाद अशोक कुमार ने देबी सिंह राणा को यह काम सौंपते हुए 10 लाख रुपये देने का आश्वासन दिया। जांच के अनुसार, देबी सिंह राणा ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव बनकर महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री को कई फोन किए और राजनीतिक लाभ व मनचाहे पदों का प्रलोभन देकर मधुसूदन बारगे के पक्ष में कार्रवाई करने का प्रयास किया। उसके मोबाइल से बरामद व्हाट्सऐप चैट भी रिकॉर्ड पर हैं।
जांच के अनुसार, देबी सिंह राणा ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव बनकर महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री को कई फोन किए और राजनीतिक लाभ व मनचाहे पदों का प्रलोभन देकर मधुसूदन बारगे के पक्ष में कार्रवाई करने का प्रयास किया। उसके मोबाइल से बरामद व्हाट्सऐप चैट भी रिकॉर्ड पर हैं।
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नई दिल्ली।
राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के प्रधान सचिव का सहायक बनकर अधिकारियों की पोस्टिंग कराने की साजिश करने वाले दो अधिकारियों की जमानत खारिज की। अधिकारियों ने महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री पर दबाव बनाकर एक अधिकारी की मनचाही पोस्टिंग कराने का प्रयास किया था। इस मामले में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) देबी सिंह राणा और एक केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा में तैनात अशोक कुमार शामिल हैं।
विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विद्या प्रकाश ने अपने आदेश में कहा कि मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और कई सह-आरोपी अब भी फरार है। ऐसे में दोनों आरोपियों को जमानत देने से जांच प्रभावित होने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के डिप्टी कलेक्टर मधुसूदन बारगे के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई रुकवाने और उन्हें अंधेरी में डिप्टी कलेक्टर या भिवंडी में एसडीओ के पद पर तैनात कराने के लिए एक साजिश रची गई थी। जांच एजेंसी का दावा कि बारगे ने इसके लिए पहले मयूर सनस से संपर्क किया। सनस ने बिचौलिए भंवर सिंह के माध्यम से अशोक कुमार से संपर्क साधा। इसके बाद अशोक कुमार ने देबी सिंह राणा को यह काम सौंपते हुए 10 लाख रुपये देने का आश्वासन दिया। जांच के अनुसार, देबी सिंह राणा ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव बनकर महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री को कई फोन किए और राजनीतिक लाभ व मनचाहे पदों का प्रलोभन देकर मधुसूदन बारगे के पक्ष में कार्रवाई करने का प्रयास किया। उसके मोबाइल से बरामद व्हाट्सऐप चैट भी रिकॉर्ड पर हैं।
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जांच के अनुसार, देबी सिंह राणा ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव बनकर महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री को कई फोन किए और राजनीतिक लाभ व मनचाहे पदों का प्रलोभन देकर मधुसूदन बारगे के पक्ष में कार्रवाई करने का प्रयास किया। उसके मोबाइल से बरामद व्हाट्सऐप चैट भी रिकॉर्ड पर हैं।
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