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बिजली कंपनियों का ऑडिट जनहित में: दिल्ली सरकार

Thu, 19 Feb 2015 09:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 19 Feb 2015 09:43 PM IST
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Audit of power companies in the public interest: Government

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनते ही बिजली कंपनियों की नकेल कसनी शुरू हो गई है। दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि तीनों बिजली कंपनियों के खातों का नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) से जांच करवाने का फैसला जनहित में है। सरकार ने कहा कि कंपनियों में जनता का धन लगा है।

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मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति आरए एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष पेश दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने बिजली कंपनियों के उस तर्क को गलत ठहराया कि केजरीवाल का रवैया उनके खिलाफ है और उन्होंने अपने घोषणा पत्र के अनुसार ही गलत तरीके से खातों की जांच करवाने का आदेश दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सरकार ने भी ऑडिट करवाने की बात की थी। ऐसे में केजरीवाल की बदनियती कैसे है।
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उन्होंने कहा कि सरकार का ऑडिट करवाने से कोई लेनादेना नहीं है और न ही केजरीवाल का। कंपनियां जनता के प्रति जवाबदेह है और इसी के तहत सीएजी से जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों का यह तर्क गलत है कि कंपनियों के खातों का सीएजी से जांच नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में टेलीकॉम कंपनियों के खातों का भी सीएजी से जांच करवाने के फैसले को उचित ठहराया था। उन्होंने कहा कि सीएजी अधिनियम के तहत भी बिजली कंपनियों के खातों की जांच की जा सकती है।
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बिजली कंपनियों ने दायर की है याचिका
अदालत खातों की जांच के संबंध में दिल्ली सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली तीनों बिजली कंपनियों की याचिका पर सुनवाई कर रही है। तीनों का तर्क है कि सीएजी को उनके खातों की जांच का अधिकार ही नहीं है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने 24 जनवरी को बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड के टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रब्यूशन लिमिटेड की याचिका के आधार पर खातों की कैग से ऑडिट करवाने के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। उपराज्यपाल ने 7 जनवरी को बिजली कंपनियों के खातों का कैग से ऑडिट करवाने का आदेश जारी किया था। इस फैसले को कंपनियों ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है, लेकिन खंडपीठ ने भी सीएजी जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

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