अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति ने दी सफलता की उड़ान, होनहार बोले- अब करेंगे सपने पूरे
- विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि इस छात्रवृत्ति से सफलता को नई दिशा मिली है।
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति हासिल करने वाले विभिन्न जिलों के विद्यार्थियों ने इस बार भी बोर्ड परीक्षाओं में सफलता का परचम फहराया है। उन विद्यार्थियों और इनके अभिभावकों का कहना है कि इस छात्रवृत्ति से उनकी सफलता को नई दिशा मिली है।
संतकबीरनगर : किसान परिवार के पुत्र नित्यप्रकाश ने हासिल किए 91% अंक
मेंहदावल विकास खंड के ग्राम नचनी निवासी किसान संतोष कुमार पांडेय के पुत्र नित्य प्रकाश पांडेय ने हाई स्कूल परीक्षा में 91 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। नित्य प्रकाश को इसी साल फरवरी में 30 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिली थी। उसका सपना आईआईटी इंजीनियर बनने का है। पिता कहते हैं, साधारण व गरीब मेधावियों के लिए अमर उजाला की यह पहल किसी संजीवनी से कम नहीं है।
मुजफ्फरनगर : आयुष को दो बार मिली छात्रवृत्ति, जिले में 10वां स्थान
खतौली के गांव लाडपुर निवासी छात्र आयुष भंगेला निवासी की मां ममता निजी कंपनी में नौकरी करती हैं जबकि नाना किसान हैं। आयुष ने अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा में 2018 और 2019 में अव्वल स्थान हासिल किया। उसे लगातार दो साल 30-30 हजार रुपये छात्रवृत्ति मिली है। आयुष ने हाई स्कूल परीक्षा में जिले में 10वां स्थान हासिल किया है।
अलीगढ़ : मिली टॉप टेन में जगह
हाईस्कूल में जिले की टॉप टेन सूची में जगह बनाने वाले मनीष कुमार ने कहा कि छात्रवृत्ति की वजह से उन्हें जिले में नौवां स्थान मिला है। वह श्री लहरी सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज घांगौली, टप्पल के छात्र हैं। किसान सुरेशचंद्र व ममता देवी के बेटे मनीष ने कहा कि छात्रवृत्ति से कॉलेज की फीस जमा की थी। परीक्षा की तैयारी के लिए मॉडल पेपर आदि खरीदे। मनीष ने कहा कि वह फिर अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा में बैठेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई है कि छात्रवृत्ति फिर मिलेगी और एनडीए की तैयारी करके सेना में अधिकारी बनेंगे।
शाहजहांपुर : चमका किसान का बेटा
अल्हागंज के बिचोली निवासी किसान राम प्रकाश राठौर और जमुना देवी के बेटे अंकेश कुमार ने हाई स्कूल में 90.83 अंकों के साथ जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है। 2018 में अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति पाने वाले अंकेश ने बताया कि छात्रवृत्ति से उसे पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली। छात्रवृत्ति से उसने किताबें खरीदीं, कोचिंग की और स्कूल की फीस भी भरी।