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बेदी के दफ्तर पर हुए हमले मामले में केस दर्ज

Tue, 03 Feb 2015 12:53 PM IST
Updated Tue, 03 Feb 2015 12:53 PM IST
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attack on bedi's election office

दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके में सोमवार शाम भाजपा मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी के चुनाव कार्यालय पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। दफ्तर में तोड़फोड़ भी की गई। हमले में तीन लोग जख्मी हो गए। घायलों को डॉ. हेडगेवार अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामले में पुलिस ने गैरइरादतन हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है।

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दरअसल, सोमवार शाम को ऑल बार एसोसिएशन दिल्ली की ओर से कृष्णा नगर इलाके में किरण के खिलाफ एक मार्च निकाला जा रहा था। उसी दौरान कुछ लोगों ने कार्यालय पर हमला कर दिया। भाजपा ने वकीलों के वेश में विरोधियों पर हमला करने का आरोप लगाया।
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उधर, वकीलों ने भाजपा के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। खबर लिखे जाने तक पुलिस को भाजपा की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली थी। पूर्वी जिला पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

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शरारती लोगों ने वकीलों पर फब्तियां कसीं थीं

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पुलिस के मुताबिक कृष्णा नगर से चुनाव लड़ रही किरण बेदी का एच-ब्लॉक कृष्णा नगर में मुख्य चुनाव कार्यालय है। सोमवार शाम को दिल्ली के सभी बार एसोसिएशन की ओर से वकीलों का एक शांति मार्च किरण बेदी के खिलाफ निकाला जा रहा था। कड़कड़डूमा कोर्ट से शुरू हुआ मार्च कृष्णा नगर तक जाना था।

वकीलों ने इसकी पूर्व सूचना पुलिस व प्रशासन को भी दी थी। आरोप है कि मार्च जैसे ही भाजपा कार्यालय के बाहर पहुंचा। कुछ शरारती लोगों ने वकीलों पर फब्तियां कसना शुरू कर दिया। इस बीच भाजपा कार्यकर्ताओं और वकीलों के बीच झड़प हो गई।

हमले में हरिहर, कपिल व मनोज नामक तीन भाजपा कार्यकर्ता जख्मी हो गए। प्रत्यक्षदर्शी आम आदमी पार्टी व कुछ वकीलों पर हमला करने का आरोप लगा रहे थे।

घायलों की हालत गंभीर, अस्पताल में भर्ती

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घायलों को पहले नजदीकी मोंगा नर्सिंग होम, बाद में डॉ. हेडगवार अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमले की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। किरण बेदी कृष्णा नगर पहुंच कर घायलों का हालचाल लिया। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए हमलावरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

हम किसी पार्टी के विरोध में एकत्रित नहीं हुए हैं, बल्कि हमारा विरोध किरण बेदी से है। बेदी ने वकीलों से मारपीट की थी और उनके खिलाफ झूठे मुकदमे बनवाए थे। अब यदि वह मुख्यमंत्री बन जाएंगी तो आम लोगों के खिलाफ भी ऐसे ही मुकदमे बनाए जाएंगे। - आरके वाधवा, चेयरमैन, ऑल जिला बार एसोसिएशन समिति

वकीलों द्वारा मारपीट के आरोप गलत हैं। मार्च शांतिपूर्ण था और उनके साथ पुलिस भी मौजूद थी। यदि वकील मारपीट करते तो पुलिस उन्हें पकड़ती। मार्च शाम 4.00 बजे कड़कड़डूमा कोर्ट से शुरू हुआ और कृष्णा नगर होता हुआ शाम 6.00 बजे वापस कोर्ट में आकर समाप्त हो गया। यह हमला भाजपा ने स्वयं करवाया है। - अरुण शर्मा, अध्यक्ष, शाहदरा बार एसोसिएशन

बेदी को लेकर दो गुटों में बंटे वकील

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भाजपा की मुख्यमंत्री की प्रत्याशी किरण बेदी के विरोध में अब पार्टी स्तर पर राजनीति शुरू हो गई है। कुछ अरसा तक खुलकर किरण बेदी का विरोध करने वाले वकील अब दो गुटों में बंट गए हैं। भाजपा लीगल सेल से जुड़े वकीलों के एक गुट ने बेदी के विरोध से खुद को अलग कर लिया।

वर्ष 1988 में वकीलों पर लाठी चार्ज करने के विरोध में वकील हमेशा से ही किरण बेदी के खिलाफ रहे हैं। बतौर मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित होने के बाद तो सभी वकीलों ने उनके खिलाफ मोर्चा खेल दिया। हालात को देखते हुए भाजपा हाईकमान ने पार्टी के लीगल सेल से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों को स्पष्ट कर दिया कि अगर बेदी या भाजपा हारती है तो उन पर भी हार का ठीकरा फोड़ा जा सकता है।

हाईकमान के कड़े रवैये के कारण भाजपा से जुड़े वकीलों ने खुलकर बेदी के विरोध से खुद को अलग करना शुरू कर दिया। यही कारण है कि सोमवार को वकीलों के बीच बेदी के खिलाफ मार्च को लेकर बहस भी हुई। उधर, एक गुट ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव खोसला के नेतृत्व में वकीलों के अरविंद केजरीवाल से मिलने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनका विरोध किसी पार्टी से नहीं है। भाजपा से जुड़े होने के बावजूद वह बेदी का विरोध कर रहे थे, लेकिन अब संदेश जाएगा कि केजरीवाल को फायदा पहुंचाने के लिए बेदी का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में उनका खुलकर विरोध करना उचित नहीं होगा।

बेदी के खिलाफ धरना
पूर्वांचल अधिवक्ता संघर्ष मोर्चा के बैनर तले वकीलों ने किरण बेदी के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरना दिया। मोर्चा संयोजक अधिवक्ता केके चौहान ने कहा कि बेदी के इशारे में 1988 में वकीलों पर लाठी जार्च हुआ और फर्जी मामले दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि हम बेदी के खिलाफ हैं और प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह हैं कि वे बतौर मुख्यमंत्री बेदी का नाम वापस लें।

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