LPG की किल्लत: 350 रुपये KG क्यों भरवाना गैस? 5 रुपये में मिल रहा भरपेट खाना; दिल्ली में लोगों ने निकाला तोड़
पूर्वी दिल्ली की एक अटल कैंटीन प्रवासी मजदूर उमेश ने बताया कि घर पर खाना बनाना मुश्किल हो रहा था, इसलिए वह अटल कैंटीन आए। वहीं, केदारनाथ ने भी कहा कि गैस न मिलने के कारण उनका परिवार घर पर खाना नहीं बना सका, ऐसे में कैंटीन राहत का काम कर रही है।
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एलपीजी गैस सिलेंडर संकट के बीच अटल कैंटीन जरूरतमंद लोगों का सहारा बनी है। इस वक्त यहां आने वाले लोगों की संख्या में हर दिन बढ़ रही है। कैंटीन संचालकों की मानें तो बीते एक सप्ताह में इसमें 30-40 फीसदी का इजाफा हुआ है। दिलचस्प यह कि पहले यहां मजदूर और जरूरतमंद लोग अकेले पहुंचते थे, लेकिन इस वक्त वह सपरिवार आ रहे हैं। तभी सुबह कई जगहों पर कैंटीन खुलने से पहले लाइन लग जाती है।
35 फीसदी बढ़ा आंकड़ा
इंद्रपुरी इलाके में अटल कैंटीन चला रहीं प्रियंका शर्मा ने बताया कि पहले दोपहर दो बजे तक उनके यहां करीब 300 पर्चियां कटती थीं। इस वक्त यह आंकड़ा 11-12 बजे के बीच पहुंच जा रहा है। आम दिनों की तुलना में यह आंकड़ा 35 फीसदी ज्यादा है। कैंटीन प्रबंधन रोजाना खाने वालों की संख्या का आंकड़ा अधिकारियों तक को भेजता है। इससे थालियों की संख्या भी कम नहीं होती। यहां रोजाना बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर, झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग और स्थानीय निवासी खाना खाने आते हैं।
घर पर खाना बनाना मुश्किल, इसलिए अटल कैंटीन आए
पूर्वी दिल्ली की एक अटल कैंटीन प्रवासी मजदूर उमेश ने बताया कि घर पर खाना बनाना मुश्किल हो रहा था, इसलिए वह अटल कैंटीन आए। वहीं, केदारनाथ ने भी कहा कि गैस न मिलने के कारण उनका परिवार घर पर खाना नहीं बना सका, ऐसे में कैंटीन राहत का काम कर रही है। आरके पुरम से आई महिला और ज्वाला नगर के विष्णु सैनी ने बताया कि कैंटीन का खाना सस्ता और भरपेट है। इससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को फायदा हो रहा है। उन्होंने बताया कि अटल कैंटीन का असर इतना व्यापक है कि यहां काम करने वाले कुछ स्टाफ अपने परिवारों के साथ भी यहीं खाना खा रहे हैं। इससे साफ है कि गैस की कमी अब सिर्फ घरों तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक और कामकाजी लोगों के लिए भी समस्या बन गई है।
चाय की टपरियों पर इंडक्शन चुल्हे का सहारा, दाम बढ़े 10 से 15 रुपये
दिल्ली में एलपीजी गैस सिलिंडर की कमी ने छोटे व्यवसायियों को मुश्किल में डाल दिया है, जहां पहले चाय की टपरियों पर आसानी से गैस सिलिंडर मिलता था, लेकिन अब दुकानदारों को मजबूरन इंडक्शन चूल्हा इस्तेमाल करना पड़ रहा है। गैस न मिलने की वजह से चाय बनाने का खर्च बढ़ गया है और दाम भी बढ़ाने पड़े हैं। पहले एक कप चाय 10 रुपये में मिलती थी, अब यह 15 रुपये में बिक रही है। इसके अलावा, सिलिंडर की बुकिंग में तकनीकी समस्याओं के कारण दुकानदार समय पर गैस नहीं ले पा रहे हैं। इस संकट ने छोटे व्यवसायियों और ग्राहकों दोनों के लिए परेशानी बढ़ा दी है।
लागत बढ़ी इसलिए बढ़ाया चाय का दाम
द्वारका में चाय विक्रेता रमेश कुमार ने बताया कि सिलिंडर की कमी के कारण रोजाना चाय बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। बुकिंग में तकनीकी समस्याओं के कारण सिलिंडर नहीं मिल रहे। ग्राहकों की भीड़ तो वही है, लेकिन अब मजबूरन उन्हें इंडक्शन पर ही चाय बनानी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि ऐसे में इंडक्शन चुल्हा इस्तेमाल करने में बिजली की लागत बढ़ती है और इसकी वजह से चाय के दाम भी बढ़ गए हैं। पहले एक कप चाय की कीमत 10 रुपये थी, अब 15 रुपये में बेचने को मजबूर हैं। इसके अलावा, बाजार में लोग महंगी दरों पर गैस भरवा रहे हैं।
दाम बढ़ने को लेकर नाराजगी
दूसरी ओर, ग्राहकों ने भी दाम बढ़ने को लेकर नाराजगी जताई है। कई लोग कहते हैं कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ने से उनका बजट प्रभावित हो रहा है। वहीं, दुकानदार भी यह बताते हैं कि सिलिंडर मिलने पर ही दाम सामान्य हो सकते हैं, क्योंकि बिजली और इंडक्शन का खर्च अलग से बढ़ रहा है। व्यापारियों ने बताया कि एलपीजी संकट की वजह से छोटे व्यवसायियों पर दबाव बढ़ गया है। सिलिंडर की समय पर उपलब्धता न होने और बुकिंग में तकनीकी समस्याओं के कारण उन्हें नए विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं। इंडक्शन चुल्हा एक वैकल्पिक उपाय है, लेकिन यह हर जगह सुविधाजनक नहीं है।