आर्यन मिश्रा हत्याकांड: गो-रक्षकों के खिलाफ मॉब लिंचिंग की धाराओं में मुकदमा...; 600 पेज का आरोप पत्र दाखिल
आर्यन मिश्रा हत्याकांड मामले में पुलिस ने आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। मॉब लिंचिंग समेत दो अन्य धाराओं को भी जोड़ा गया है। अब आरोपियों की मुश्किलें बढ़ेंगी।
विस्तार
फरीदाबाद में 12वीं कक्षा के छात्र आर्यन मिश्रा को गो-तस्कर समझकर गोली मारने के मामले में अब पुलिस मॉब लिंचिंग की धाराओं में कार्रवाई करेगी। मंगलवार को अपराध शाखा की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 600 पेज की चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। आर्यन के साथ कार में मौजूद दोस्तों समेत कुल 30 लोगों को मामले में गवाह बनाकर उनके बयान दर्ज किए गए हैं।
पहली बार फरीदाबाद पुलिस ने मॉब लिंचिंग की धाराओं समेत तीन और धाराओं को जोड़ा है। इससे अब आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय है। हालांकि पुलिस की जांच से आर्यन का परिवार संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि आर्यन के साथ कार में मौजूद लोगों की भूमिका भी संदिग्ध थी, पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
पुलिस के मुताबिक 23 अगस्त को आर्यन मिश्रा (20) अपने दोस्त शेंकी और हर्षित के साथ कार से दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे से गुजर रहा था। इसी बीच पांच गो-रक्षकों सौरभ, अनिल कौशिक, वरुण, कृष्णा और आदेश ने कार से इनका पीछा करना शुरू कर दिया। गो-रक्षकों को खबर मिली थी कि दो वाहनों से कुछ गो-तस्कर शहर में रेकी करने की नियत से निकले हैं।
आरोपी कार से आर्यन की कार का पीछा करते रहे। करीब 25 किलोमीटर पीछा करने के बाद गदपुरी टोल के नजदीक आरोपियों ने गोली चला दी। गोली कार में मौजूद आर्यन मिश्रा को लगी। बाद में उसकी मौत हो गई। कई दिनों तक मामले को दबाकर रखा गया। मामला जब सुर्खियाें में आया तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को 28 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया।
घटना के बाद हंगामा हुआ। परिजन लगातार पुलिस की जांच पर सवाल उठाते रहे, उनका कहना था कि आर्यन के साथ कार में मौजूद लोगों की भूमिका भी संदिग्ध है। उसकी हत्या में इन लोगों का भी हाथ है। पुलिस ने इनसे जांच भी की, लेकिन सभी को क्लीनचिट दे दी गई। अब पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है।
चार्जशीट में पहली बार मॉब लिंचिंग की धारा...
अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 600 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई है। शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 103 (1) (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, आरोपपत्र में इस धारा को बीएनएस की धारा 103 (2) से बदल दिया गया है। 103 (2) के तहत मॉब लिंचिंग को परिभाषित किया गया है। इस धारा को तब लगाया जाता है, जब पांच या उससे अधिक लोगों का समूह नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर हत्या की वारदात को अंजाम देता है। ऐसी किसी वारदात में शामिल समूह के प्रत्येक सदस्य को अदालत मौत या आजीवन कारावास के साथ जुर्माना दोनों की सजा सुना सकती है।
आरोप पत्र में दो और धाराएं जोड़ी गई...
आरोपी गो-रक्षकों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने दो और धाराएं जोड़ी हैं। इनमें आपराधिक साजिश के लिए बीएनएस की धारा 61 (24) और जानबूझकर सबूत छिपाने के लिए बीएनएस की धारा 238(2) लगाई है। अवैध रूप से इकट्ठा होने और घातक हथियारों के साथ दंगा करने की अन्य धाराओं के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धाराओं को चार्जशीट में बरकरार रखा गया है। बता दें कि बीएनएस से पहले आईपीसी में भीड़ द्वारा की गई हत्या के लिए कोई खास प्रावधान नहीं था।
पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। आर्यन के साथ कार में मकान मालकिन, उनके बेटे और अन्य लोग भी मौजूद थे। उनको पुलिस ने जांच में लगभग क्लीन चिट दे है। अपने अधिवक्ता से बात करने के बाद ही पूरी तरह से कह पाएंगे। आरोपियों के खिलाफ जो धाराएं जोड़ी गई हैं और चांजशीट कितनी सही है, इसका जांच के बाद ही इसका पता चलेगा। - सियानंद मिश्रा, आर्यन के पिता