कहीं इस लड़ाई में अकेले न रह जाएं केजरीवाल
लोकसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद आम आदमी पार्टी में टकराव और बिखराव लगातार जारी है। चुनाव में महज चार सीटें हासिल करने वाली 'आप' को एक के बाद एक झटके मिल रहे हैं।
हार के बाद पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल का जेल जाना, पार्टी के टूटने की बड़ी वजह बना और केजरी की नामौजूदगी में पार्टी के भीतर टकराव शुरू हो गया।
गाजियाबाद से चुनाव हारने वाली शाजिया इल्मी और कैप्टन गोपीनाथ के पार्टी छोड़ने के बाद अब 'आप' के थिंक टैंक योगेंद्र यादव का इस्तीफा आम आदमी पार्टी और संयोजक अरविंद केजरीवाल दोनों के लिए ही बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्या अकेले रह जाएंगे केजरीवाल?
आम आदमी पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार और चाणक्य कहे जाने वाले योगेंद्र यादव ने शनिवार शाम अचानक इस्तीफे की पेशकश करके सबको चौंका दिया।
इससे पहले योगेंद्र और हरियाणा 'आप' के संयोजक नवीन जसहिंद के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद दोनों ही नेताओं ने पार्टी आलाकमान को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
अब बड़ा सवाल यह है कि दिग्गज नेता और पार्टी के संस्थापक सदस्य ही इससे किनारा करने लगे हैं तो क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले अरविंद केजरीवाल अकेले इस लड़ाई को आगे ले जा पाएंगे।
AAP को लग सकता है एक और झटका
हालांकि आम आदमी पार्टी ने योगेंद्र यादव का इस्तीफा नामंजूर कर दिया
है लेकिन थिंक टैंक के इस्तीफे ने एक बार तो पूरी पार्टी को झकझोर दिया
है।
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद ऐसे संकेत मिलते रहे हैं कि कुमार विश्वास भी पाला बदलकर बीजेपी में जा सकते हैं।
उधर,
शाजिया इल्मी पहले ही केजरीवाल पर तमाशा करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से
इस्तीफा दे दिया था। शाजिया ने यह भी कहा था कि पार्टी रास्ते से भटक गई
है इसे दोबारा संगठित करने की जरूरत है।
क्या करेंगे केजरीवाल?
आम आदमी पार्टी के दिग्गजों के बीच चल रही इस खींचतान और वाद-विवाद का बुरा असर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर भी पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव हारने वाले अरविंद केजरीवाल को पार्टी को संगठित करने और पार्टी की मुख्य धारा पर चलने की जरूरत है।
पार्टी में बिखराव का जो दौर चल रहा है उस पर अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो केजरीवाल इस लड़ाई में अकेले ही न रह जाएं, इस बात से भी नकारा नहीं जार सकता।