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तीखी हुई केजरीवाल-नजीब जंग की तकरार

Sat, 16 May 2015 02:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 16 May 2015 02:33 PM IST
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Arvind Kejriwal and Najib Jung then heated altercation
दिल्ली सरकार किसकी? उपराज्यपाल या मुख्यमंत्री की? सर्वोपरि उपराज्यपाल हैं या फिर मुख्यमंत्री? अंतिम फैसला लेने का अधिकार किसका है?
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मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बिना उपराज्यपाल ने शकुंतला डी गैमलिन को कार्यवाहक मुख्य सचिव बनाया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा उपराज्यपाल ने असंवैधानिक कार्य किया, उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा उन्हें अधिकार है।

इन सवालों का जवाब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अधिकार की लड़ाई खुले प्लेटफॉर्म पर आ गई है। नया मामला कार्यवाहक मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर है। इस मामले में आईएएस अधिकारी संविधान व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम में उपराज्यपाल को बॉस बनाए जाने का हवाला देकर नजीब जंग के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
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मुख्यमंत्री 1984 बैच की आईएएस अधिकारी शकुंतला डी गैमलिन को इस रेस से बाहर रखना चाहते थे तो उपराज्यपाल ने शक्तियों का इस्तेमाल करके शकुंतला डी गैमलिन को ही कार्यवाहक मुख्य सचिव बना दिया है।
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नियुक्ति से चंद घंटे पूर्व गैमलिन ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री की तरफ से बिना सबूत निजी कंपनी के साथ मिले होने के आरोप लगाने व रेस से बाहर रहने की बात पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

सचिव पर किसका तर्क सही?

Arvind Kejriwal and Najib Jung then heated altercation

कार्यवाहक मुख्य सचिव की नियुक्ति को मुख्यमंत्री कार्यालय ने असंवैधानिक करार दिया है। तर्क दिया है कि शकुंतला डी गैमलिन के आचरण को लेकर दिक्कत थी। क्योंकि वह बिजली वितरण कंपनी के काफी करीब मानी जाती हैं। इतना ही नहीं बिजली वितरण कंपनी की सरकार में पैरवी करती रही हैं।

मुख्य सचिव केके शर्मा 14-24 मई तक अमेरिका गए हैं। ऐसे में कार्यवाहक मुख्य सचिव की नियुक्ति के मामले में वरिष्ठता सूची के हिसाब से जिन आईएएस अधिकारियों के नाम सेवा विभाग ने भेजे थे, उन्हें मुख्यमंत्री कार्यवाहक मुख्य सचिव नहीं बनाना चाहते थे।

इस विरोध के बावजूद उपराज्यपाल ने गैमलिन की नियुक्ति कर दी। इसे मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र को चुनौती माना जा रहा है।
वहीं नौकरशाह (प्रधान सचिव व सचिव) दिल्ली में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच पैदा हुए इस विवाद को नहीं सुलझने तक उपराज्यपाल के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

उनका तर्क है कि संविधान व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम में सरकार का मतलब उपराज्यपाल (प्रशासक) लिखा गया है। सूत्र बताते हैं कि चाणक्यपुरी में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने मामले में बैठक भी की है।

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