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यहां तो हद ही हो गई: जालसाजी से बेच डाली सेना की 23 करोड़ की जमीन, 10 महीने तक अफसरों को भी न लगी भनक

Thu, 29 Jun 2023 04:21 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 29 Jun 2023 04:21 PM IST
सार

सदर तहसील के अफसरों ने बुधवार को दिनभर दस्तावेज खंगालने से लेकर मौका मुआयना तक किया। रात नौ बजे सिहानी गेट थाने में जमीन के खरीदार समीर मलिक और बेचने वाले मजीद के खिलाफ नामजद केस भी दर्ज कराया।

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Army s land worth 23 crores sold by forgery in Vijayanagar of Ghaziabad
सांकेतिक फोटो - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

गाजियाबाद के विजयनगर क्षेत्र के गांव मिर्जापुर में सेना की लगभग 23 करोड़ मूल्य की 18,710 वर्ग मीटर जमीन जालसाजी से बेच दी गई। इसकी जानकारी होने पर सदर तहसील के अफसरों ने बुधवार को दिनभर दस्तावेज खंगालने से लेकर मौका मुआयना तक किया। रात नौ बजे सिहानी गेट थाने में जमीन के खरीदार समीर मलिक और बेचने वाले मजीद के खिलाफ नामजद केस भी दर्ज करा दिया। साथ ही, बैनामा निरस्त कराने के लिए रिपोर्ट तैयार कर ली। समीर और मजीद की अब पुलिस को तलाश है।

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इसका खुलासा तब हुआ जब समीर ने जमीन को बेचने की तैयारी कर ली। उसने जिस शख्स से सौदा किया, उसने तहसील में जाकर दस्तावेज खंगाले। संदेह होने पर उसने ही अफसरों को अवगत कराया। अफसरों को तहसील के रिकार्ड से पता चला है कि 17 अगस्त 2022 को जमीन का बैनामा हुआ। जमीन बेची अर्थला मोहननगर के निवासी मजीद ने और खरीदी सेमटेक एसोसिएट कंपनी के निदेशक जस्सीपुरा निवासी समीर मलिक ने। जमीन 10 करोड़ 50 लाख में बेची गई। सर्किल रेट के अनुसार इसका मूल्य 23 करोड़ से ज्यादा है। सर्किल रेट पर ही स्टांप शुल्क चुकाया गया। बैनामे में जमीन को खाली आवासीय भूमि बताया गया।

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तहसील की टीम ने स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट दी कि बैनामे में बताई गई जमीन सेना की राइफल रेंज की जमीन है, जो लंबे समय से खाली पड़ी है। पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धारा में केस दर्ज किया है। जमीन खरीदने के लिए समीर मलिक ने 10 करोड़ का कर्ज फरीदाबाद के उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक से लिया। 

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दस महीने तक अफसरों को जालसाजी की भनक न लगी
जालसाजी के इस खेल में सबसे हैरानी की बात यह है कि तहसील के अफसरों को दस महीने तक इसकी भनक नहीं लगी। सदर तहसील में ही इस जमीन का बैनामा हुआ। राजस्व मामलों के जानकारों का कहना है कि बड़े बैनामो में स्टांप के अफसरों को खुद मौका मुआयना करने के शासन के निर्देश हैं। अगर एक बार भी अफसर मौके पर गए होते तो तभी खुलासा हो जाता। सवाल यह है कि अफसर गए क्यों नहीं? सवाल यह भी है कि बैनामे के समय तहसील के अफसरों को इस खेल का पता क्यों नहीं चला? अगर जमीन के पुराने कागत देखे गए होते तो यह जालसाजी तभी पकड़ में आ सकती थी। अब यह जांच में पता चलेगा कि जालसाजी से अफसरों के अनजान होने की वजह सिर्फ लापरवाही थी या कुछ और। जमीन से अवैध कब्जे हटाने वाले और भूमाफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाले पुलिस-प्रशासन के अफसरों को भी इतने बड़े खेल की जानकारी न हो पाना भी हैरान करता है।

इस तरह किया खेल
बैनामे में जो खसरा नंबर दर्ज कराया, वह घनी आबादी का है। उस पर खाली जमीन नहीं है। बताए गए खसरे से सटी सेना की जमीन ही खाली है। बैनामे में जमीन को खाली बताया गया। जमीन को तीन ओर से खाली बताया गया। ऐसी जमीन भी सेना की राइफल रेंज की ही है। जमीन का स्टांप शुल्क सर्किल रेट पर ही दिया गया ताकि किसी तरह की जांच-पड़ताल न हो। साजिश के तहत मार्च 2022 में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में जमीन बेचे जाने के लिए आवेदन किया। जमीन का वक्फ बोर्ड से कोई वास्ता नहीं, सिर्फ गुमराह करने के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन में जमीन 11 बीघा बताई गई जबकि बैनामा 22 बीघा जमीन का किया गया है। जांच में साफ हो गया कि जिस जमीन का बैनामा हुआ, वह रक्षा मंत्रालय की है। इसकी जानकारी होते ही केस दर्ज करा दिया गया है। जमीन पर अवैध कब्जे की नीयत से यह जालसाजी की गई है। इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी - विनय कुमार सिंह, एसडीएम सदर

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