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Al-Falah University: अल फलाह विवि में सत्यापन बिना नियुक्ति... कागजों में दिखाए डॉक्टर

Sun, 18 Jan 2026 01:20 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 18 Jan 2026 01:20 PM IST
सार

दिल्ली धमाके में के बाद विवादों में आए अल फलाह विश्वविद्यालय को लेकर धीरे-धीरे खुलासे हो रहे हैं। अब सामने आया है कि अल फलाह विवि में सत्यापन बिना नियुक्ति हुई थी। आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर नबी जैसे कुछ स्टाफ भर्ती भी किए तो पुलिस से उनका सत्यापन नहीं कराया।

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Appointments made at Al-Falah University without verification doctors shown on paper only
अल फलाह यूनिवर्सिटी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पिछले साल लाल किला के पास आत्मघाती विस्फोट के बाद विवादों में आए अल फलाह विश्वविद्यालय का काला चिट्ठा धीरे-धीरे सामने आ रहा है। विश्वविद्यालय ने न सिर्फ मेडिकल के छात्रों और उनके अभिभावकों से शुल्क के नाम पर अवैध वसूली की, बल्कि मान्यता पाने के लिए नियामकों को भी गुमराह किया। 
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निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में फर्जी मरीज भर्ती किए और कागजों पर डॉक्टरों की नियुक्ति दिखाई। आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर नबी जैसे कुछ स्टाफ भर्ती भी किए तो पुलिस से उनका सत्यापन नहीं कराया।
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अल फलाह विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज संचालित करने वाले अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और अल फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से धन शोधन मामले में दायर चार्जशीट में ये जानकारियां सामने आई हैं। 
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ईडी ने विश्वविद्यालय की धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत लगभग 140 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। छात्रों के साथ धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन के मामले में ईडी ने सिद्दीकी को पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया था।
 

लगभग 260 पन्नों की चार्जशीट में सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट पर छात्रों की ओर से भुगतान की गई फीस से कथित तौर पर अवैध धन जुटाने और साथ ही अपने संस्थानों की मान्यता और प्रमाणन के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में मुकदमा चलाने की मांग की गई है। 
 

कहा गया है कि अल फलाह ट्रस्ट और सिद्दीकी ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता पाने के लिए अस्पताल में फर्जी मरीजों को भर्ती किया। अस्पताल में जिन डॉक्टरों की नियुक्ति दिखाई गई वह सिर्फ कागजों पर ही थे, न कभी अस्पताल में और न ही कभी कक्षाएं ही ली।
 

नियुक्तियों पर अंतिम फैसला सिद्दीकी का
ईडी विश्वविद्यालय और ट्रस्ट के खिलाफ वित्तीय अपराधों की जांच कर रहा है। एजेंसी ने अपने अभियोग शिकायत में दावा किया है कि लाल किले विस्फोट के मुख्य आरोपी उमर उन नबी और अन्य आरोपी डॉक्टरों की नियुक्तियां विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख डॉ. जमील खान की ओर से अनुशंसित की गई थी।

इसके बाद समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी द्वारा अनुमोदित की गई थीं। लाल किले विस्फोट मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ आरोप अल फलाह विश्वविद्यालय के कई महत्वपूर्ण प्रबंधकीय कर्मचारियों, जिनमें कुलपति और प्रधानाध्यापक शामिल हैं, के बयानों और छापेमारी के दौरान जब्त किए गए कई दस्तावेजी सबूतों पर आधारित हैं।
 

सिद्दीकी करते थे डॉक्टरों की नियुक्ति
चार्जशीट में कुलपति भूपिंदर कौर आनंद का भी बयान है। उन्होंने माना है कि लाल किले विस्फोट मामले में आत्मघाती डॉ. उमर, नबी, जूनियर रेजिडेंट डॉ. मुजम्मील और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहीन की नियुक्ति उनके कार्यकाल में हुई। उन्होंने यह भी बताया कि अंतत: इन डॉक्टरों की नियुक्तियों को सिद्दीकी ने ही अनुमोदित किया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि उन उम्मीदवारों के संबंध में कोई पुलिस सत्यापन या जांच नहीं की गई थी।

विश्वविद्यालय का पीआरओ फर्जी मरीजों का ब्योरा रखता था  
सूत्रों ने बताया कि चार्जशीट में अल फलाह के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एक अधिकारी फरदीन बेग के बयान का उल्लेख है, जिन्होंने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की ओर से फर्जी मरीजों को भर्ती करने की जानकारी होने की बात स्वीकार की है। एजेंसी ने दावा किया कि इन फर्जी मरीजों को कथित तौर पर निरीक्षण के दौरान मरीजों की मौजूदगी का भ्रम पैदा करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं के समन्वय से रखा गया था।
 

बयान में यह भी सामने आया है कि फर्जी मरीजों के विस्तृत विवरण और भुगतान विवरण अल फलाह के जनसंपर्क अधिकारी कामरान आलम रखता था, जिनकी जांच और अनुमोदन सिद्दीकी करते थे। इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया है कि नियमित प्रक्रिया के तहत फर्जी मरीजों को वाउचर के बदले नकद भुगतान जारी किए जाते थे।
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